उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एसएन वर्मा के खिलाफ झारखंड के एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज किया है। वर्मा मौजूदा पद पर तैनात होने से पहले झारखंड राज्य ऊर्जा विकास निगम के सीएमडी थे।

झारखंड स्थित सुवर्ण रेखा पनबिजली परियोजना में 20.87 करोड़ रुपये की गड़बड़ी के आरोप में पूर्व सीएमडी वर्मा सहित छह अफसरों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। हालांकि वर्मा पर केस दर्ज होने की सूचना उत्तराखंड सरकार के पास नहीं पहुंची है।

एसएन वर्मा जून 2011 से दिसंबर 2014 तक रांची में राज्य बिजली बोर्ड के अध्यक्ष और ऊर्जा विकास निगम के सीएमडी थे। वह उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएन) से डेपुटेशन पर झारखंड गए थे। जनवरी 2015 में वह देहरादून लौटकर यूजेवीएन के एमडी बनाए गए।

ऊर्जा निगम ने 2012 में सुवर्ण रेखा पनबिजली परियोजना में टेंडर जारी करने के बजाय भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) को नॉमिनेशन के आधार पर काम दिया। इसके बाद दो आरोप लगे। भेल पर आरोप लगा कि उसने खुद काम न कर किसी और एजेंसी से कम पैसे में काम कराया। उधर झारखंड ऊर्जा निगम पर भी यह आरोप लगा कि उसने भेल को भुगतान गलत तरीके से किया।

जानकारी के मुताबिक झारखंड में रघुवर दास की बीजेपी सरकार बनने के बाद उच्च स्तर पर तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने भेल को दिए गए काम की विशेष जांच की। गड़बड़ी की पुष्टि होने पर सरकार ने यह रिपोर्ट सीबीआई को भी भेजी। इस बीच झारखंड सरकार के एंटी करप्शन ब्यूरो ने दो जून को रांची में एसीबी ने वर्मा के अलावा राज्य बिजली बोर्ड के तत्कालीन सदस्य खिलाफ आलोक शरण, मुख्य अभियंता जीएनएस मुंडा, मुख्य अभियंता डीएन राम, प्रोजेक्ट मैनेजर बीके चौधरी और कार्यपालक अभियंता प्रवीण कुमार पर भी मुकदमा दर्ज किया है।

एसीबी ने अभी किसी तरह की गिरफ्तारी नहीं की है। यूजीवीएनएल के एमडी एसएन वर्मा फिलहाल विदेश दौरे पर गए हुए हैं। प्रमुख सचिव ऊर्जा उमाकांत पंवार का कहना है, ‘हमारे पास यूजीवीएनएल के एमडी के खिलाफ झारखंड में कोई मुकदमा दर्ज होने की अधिकारिक सूचना नहीं आई है।’