पोंटी हत्याकांड : सुप्रीम कोर्ट का नामधारी की जमानत अर्जी पर सुनवाई से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में 2012 में हुई गोलीबारी की एक घटना, जिसमें शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा और उसका भाई हरदीप मारे गए थे, के आरोपी उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के बर्खास्त अध्यक्ष सुखदेव सिंह नामधारी की जमानत अर्जी पर विचार करने से बुधवार को यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उनके खिलाफ आरोप गंभीर हैं।

न्यायमूर्ति पी.सी. घोष और न्यायमूर्ति अमिताव रॉय की अवकाशकालीन पीठ ने कहा, ‘हम याचिका पर विचार करने में रुचि नहीं रखते। आपके खिलाफ गंभीर आरोप हैं।’ शीर्ष अदालत ने इस बारे में सख्ती से संज्ञान लिया कि नामधारी पहले निचली अदालत से स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत हासिल कर चुके हैं, जबकि उनकी नियमित जमानत अर्जी दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित थी।

पीठ ने कहा, ‘यह अजीब है। निचली अदालत आपको अंतरिम जमानत देती है, जबकि जमानत याचिका हाईकोर्ट में लंबित है।’ नामधारी ने शीर्ष अदालत में अपनी याचिका में कहा कि वह स्वस्थ नहीं हैं, इसलिए मुकदमा लंबित रहने के दौरान उन्हें जमानत पर छोड़ा जाए।

निचली अदालत ने इस साल अप्रैल में नामधारी की अंतरिम जमानत को निरस्त कर दिया और उन्हें जेल भेज दिया था। निचली अदालत फिलहाल मामले में अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज कर रही है।

अंतरिम जमानत को रद्द करते हुए निचली अदालत ने कहा था कि मामले में मुख्य फरियादी नंदलाल महतो अपने बयान से पलट गया था और इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि नामधारी ने उसे धमकाया हो या बयान से पलटने के लिए पैसा दिया हो।

नामधारी की अंतरिम जमानत को निरस्त करने की मांग वाली याचिका हरदीप की पत्नी ने निचली अदालत में दाखिल की थी।