शिवसेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बुधवार को कहा कि वे विदेशी मंचों भारत में भ्रष्टाचार पर सार्वजनिक बयान देकर देश को बदनाम करना बंद करें। शिवसेना ने पीएम मोदी द्वारा विदेश दौरों के दौरान भारत में भ्रष्टाचार की बार-बार आलोचना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि दीर्घकालिक संदर्भ में इसका देश पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में लिखे एक संपादकीय में कहा, ‘प्रधानमंत्री ने दोहा में सार्वजनिक तौर पर कहा कि भारत किस कदर भ्रष्टाचार के दलदल में फंसा हुआ था और इसे साफ करने के लिए उन्होंने अपने द्वारा किए गए कार्यों का ब्यौरा दिया। भीड़ ने तालियां बजाईं और उनका उत्साहवर्धन किया। यह और कुछ नहीं, बस विदेशों में देश की छवि खराब करना है।’

लेख में इस बात पर आश्चर्य जताया गया है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के दो साल बाद भी अगर लोग भ्रष्टाचार पर चर्चा करते हैं, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है। लेख के मुताबिक, ‘भ्रष्टाचार का मामला (बीजेपी शासित) गुजरात, महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश में आता है। क्या अब भी उसके लिए गांधी परिवार को ही दोष दिया जाएगा?’

शिवसेना ने कहा, ‘प्रधानमंत्री अच्छी तरह जानते हैं। वह देश का चेहरा हैं और दुनिया उन पर यकीन करती है। लेकिन दुनिया उनके बयानों का गलत अर्थ भी निकाल सकती है, जिसका सीधा असर हमारी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।’

पीएम मोदी के हाल के स्विट्जरलैंड दौरे पर चर्चा करते हुए लेख में कहा गया है कि पीएम मोदी ने स्विट्जरलैंड से काला धन रखने वालों के नामों का खुलासा करने का अनुरोध किया था, जिससे विदेशों में भारत की छवि खराब हुई। चाहे जो भी हो, इससे साफ जाहिर है कि भारत में काफी मात्रा में काला धन है। लेकिन इसे बाहर निकालने के लिए किया क्या गया?

शिवसेना ने कहा कि भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जहां बीफ, चिकन, मटन, अंडा, मछली, लहसुन और प्याज खाना पाप है, लेकिन जनता की गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ करना अपराध नहीं है।