उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार के मंत्रिमंडल ने सर्किल रेट में कमी के निर्णय को मंजूरी दे दी है। इसके बाद राज्य के अर्द्धनगरीय क्षेत्रों में कृषि और अकृषि भूमि के बढ़े सर्किल रेट में कमी आ जाएगी। करीब पांच महीने पहले सरकार ने जमीनों के सर्किल रेट बढ़ाए थे।

मंत्रिमंडल के इस निर्णय से फ्लैट्स की कीमत में भी कमी आएगी। इससे लोगों का जमीन और घर खरीदने का सपना कम पैसे खर्च करने पर भी पूरा हो सकेगा।

सोमवार को सचिवालय में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस निर्णय पर फाइनल मुहर लग गई। सरकार ने इसी साल जनवरी में सर्किल रेट में 10 से 30 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी की थी।

हालांकि इस निर्णय का काफी विरोध हुआ था। कई जगहों पर जमीन के रेट में बहुत ज्यादा वृद्धि होने के बाद कई विधायकों ने भी विरोध दर्ज कराया था। मजबूर होकर सरकार ने सर्किल रेट घटाने के लिए वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश की अध्यक्षता में मुख्य सचिव और सभी जिलाधिकारियों की एक समिति गठित की।

इस समिति ने सर्किल रेट की बढ़ी दरों में औसतन 50 फीसदी तक की कटौती की सिफारिश की, जिसे राज्य मंत्रिमंडल ने स्वीकार कर लिया।

मंत्रिमंडल ने 2012 के सर्किल रेट को आधार मानते हुए 10 फीसदी सामान्य वार्षिक वृद्धि के आधार पर 40 फीसदी बढ़ोत्तरी तय की। ऐसे में जनवरी में जिन जमीनों के दाम में 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई थी, उनमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।

40 से 80 फीसदी तक बढ़ोतरी वाले क्षेत्रों में भी दर घटाकर 40 फीसदी रखी गई है। 80 फीसदी से ज्यादा बढ़ोत्तरी वाले इलाकों में भी यह 40 फीसदी की जाएगी। 2014 की दरों में 10 फीसदी से कम दर मंजूर नहीं होगी।

राज्य मंत्रिमंडल के इस निर्णय से बढ़े सर्किल रेट में औसतन 50 फीसदी तक की कमी आएगी। वहीं फ्लैट के निर्मित क्षेत्रफल की दर भी 18 हजार रुपये से घटाकर 15 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दी गई है।

निर्मित क्षेत्रफल की निर्माण दर और लिंटरपोश निर्माण की दर अलग-अलग तय होने से फ्लैट खरीदने वालों को दिक्कत थी। अब यह दोनों दरें समान कर दी गई है। वहीं सीमा में स्थित मार्गों की चौड़ाई के अनुसार आनुपातिक बढ़ोत्तरी में 10 से 50 फीसदी तक कमी की गई है।

जनवरी में हुए निर्णय के अनुसार कृषि भूमि की दर अकृषि भूमि के सर्किल रेट के आधार पर तय किए जा रहे थे। तब प्रति हेक्टेयर के बजाय प्रति वर्ग मीटर में बढ़ोत्तरी की गई थी। अब इसमें भी करीब 50 फीसदी तक की कमी की गई है।

नई सड़कों की दरों में 20 फीसदी तक कमी होगी। हालांकि इसमें नई सड़कों पर स्थित क्षेत्र विशेष की निर्धारित अकृषि दरों में न्यूनतम 10 फीसदी का अंतर होना चाहिए। साथ ही पर्वतीय जिलों में अकृषि भूमि की न्यूनतम सीमा पांच सौ वर्ग मीटर की गई है, इससे लघु काश्तकारों को फायदा मिलेगा।

जनवरी में हुई बढ़ोत्तरी के बाद शहरों के अधिकांश क्षेत्रों में सर्किल रेट में बढ़ोत्तरी हुई थी, वहीं कई जगह दाम घटे भी थे। अस्थायी राजधानी देहरादून के राजपुर रोड पर घंटाघर से आरटीओ तक सर्किल रेट में कमी की गई। यहां सर्किल 60 हजार से घटाकर 50 हजार किए गए।

आरटीओ से मसूरी बाइपास तक के सर्किल रेट में कोई अंतर नहीं आया और यह 40 हजार ही रहे। जीएमएस रोड पर सर्किल रेट 21 हजार से घटाकर 18 हजार और ट्रांसपोर्टनगर में 21 हजार से बढ़ाकर 24 हजार किए गए थे।