हल्द्वानी को कुमाऊं का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। मैदानी इलाकों से लोग पहले हल्द्वानी ही पहुंचते हैं, इसके बाद शुरू होता है कुमाऊं के पहाड़ों का सफर। अब इसी हल्द्वानी में अन्तर्राज्यीय बस अड्डे (ISBT) के निर्माण को राज्य कैबिनेट में मंजूरी दे दी है।

लम्बे समय से हल्द्वानी में आईएसबीटी के निर्माण की मांग उठ रही थी। मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में राज्य के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद कुमाऊं क्षेत्र के यात्रियों को सफर करने में सहुलियत मिलेगी।

अभी तक राज्य में देहरादून और ऋषिकेश में अन्तर्राज्यीय बस टर्मिनल है। हल्द्वानी में आईएसबीटी के निर्माण के बाद परिवहन सेवाएं बेहतर हो पाएंगी। राज्य की परिवहन सेवाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। एक ओर परिवहन बेड़े में नई बसों को शामिल किया जा रहा है तो दूसरी ओर बस अड्डों के सुधारीकरण के लिए भी तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं।

लंबे समय से उठ रही थी ISBT की मांग
हल्द्वानी में लम्बे समय से आईएसबीटी के निर्माण की मांग उठ रही थी। सीएम रावत की घोषणा के बाद राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस ड्रीम प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई। हल्द्वानी में बनने वाले आईएसबीटी की लागत करीब 75 करोड़ रुपये आएगी और यह डेढ़ से दो साल में बनकर तैयार हो जाएगा।

बता दें कि अस्थायी राजधानी देहरादून में आईएसबीटी का निर्माण काफी पहले हो गया था। उसके बाद सरकार ने गढवाल के प्रवेश द्वार ऋषिकेश में आईएसबीटी का निर्माण कराया।

कुमाऊ क्षेत्र में हल्द्वानी से रोडवेज की सबसे ज्यादा बसों का संचालन किया जाता है। हल्द्वानी से बसों का संचालन यूपी, दिल्ली, हिमाचल, हरियाणा, पंजाब सहित कई राज्यों के लिए किया जाता है। वर्तमान बस अड्डे में गाड़ियों की आवाजाही अधिक होने के कारण शहर में ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित होती है।

हल्द्वानी में जाम के झाम से भी मिलेगी मुक्ति
आईएसबीटी बनने के बाद जाम की समस्या से भी छुटकारा मिल सकेगा। साथ ही रोडवेज की बसों के संचालन में भी मदद मिल सकेगी। बता दें कि राज्य सरकार आईएसबीटी का निर्माण स्वयं के संसाधनों से करने जा रही है। देहरादून आईएसबीटी का निर्माण पीपीपी मोड में किया गया था, लेकिन हल्द्वानी आईएसबीटी को परिवहन विभाग के द्वारा बनाया जाएगा।

सचिव परिवहन ने बताया कि हल्द्वानी आईएसबीटी निर्माण को कैबिनेट की मंजूरी के बाद उसके निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया कि बसे अड्डे को बनने में डेढ़ से दो साल का समय लगेगा।