2002 गुजरात दंगों के गुलबर्ग सोसाइटी मामले में सोमवार को सजा का ऐलान हो सकता है। स्पेशल एसआईटी कोर्ट ने 2 जून को इस मामले में 24 लोगों को दोषी ठहराया था, जिनमें 11 लोग हत्या के दोषी करार दिए गए थे।

कोर्ट ने मामले के 36 आरोपियों को बरी कर दिया था। 28 फरवरी 2002 को हजारों की हिंसक भीड़ ने गुलबर्ग सोसायटी पर हमला कर दिया था। 69 लोग मारे गए थे। 39 लोगों के शव बरामद हुए थे। 30 लापता लोगों को सात साल बाद मृत मान लिया गया था।

मरने वालों में पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफ़री भी थे। मामले की सुनवाई 2009 में शुरू हुई। कुल 66 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें चार की मौत हो चुकी है। कुल 338 लोगों की गवाही हुई।

दरअसल 28 फरवरी 2002 को हजारों की हिंसक भीड़ ने गुलबर्ग सोसायटी पर हमला कर दिया था। इसमें 69 लोग मारे गए थे, जिनमें पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफ़री भी थे। 39 लोगों के शव बरामद हुए थे और 30 लापता लोगों को सात साल बाद मृत मान लिया गया था।

गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में 2010 में पूछताछ हुई थी। एसआईटी रिपोर्ट में उन्हें क्लीन चिट दे दी गई थी। 15 सितंबर 2015 को सुनवाई ख़त्म हो गई थी। पीड़ित परिवार आरोपियों के लिए कड़ी सज़ा की मांग कर रहे हैं।