पहाड़ों में रविवार सुबह हुई मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया। पिथौरागढ़ जिले की कई सड़कें मलबा आने से बंद हो गईं। पिथौरागढ़-धारचूला एनएच पर दो जगहों में मलबा गिरने से नौ घंटे वाहनों की आवाजाही ठप रही। सातशिलिंग-थल मार्ग पर सुवालेख और देवलथल के पास मलबा आने से यातायात छह घंटे बंद रहा।

पिथौरागढ़-धारचूला हाइवे बंद होने से मुनस्यारी से लौट रहे सेना के 100 वाहनों को ओगला से नारायणनगर होते हुए अस्कोट के लिए भेजा गया। इस सड़क पर रणगांव के पास भी भारी मलबा आने से वाहनों की आवाजाही बंद हो गई।

कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग धारचूला और तवाघाट के बीच तीन स्थानों पर टूट गया है। तीनतोला, वर्तीगाड़ और मांगती में मलबा आने से वाहनों की आवाजाही बंद है।

टनकपुर-तवाघाट रोड पर कई जगह मलबा आने से आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उधर, कनालीछीना (पिथौरागढ़) के सुवालेख क्षेत्र में मूसलाधार बारिश से भारी तबाही मच गई। लोगों का कहना है कि वहां बादल फटने जैसी घटना हुई। बिछुल ग्राम पंचायत में चार मकान मलबे से पट गए हैं।

इन परिवारों को कहीं अन्य जगह शिफ्ट किया गया है। बिछुल गांव को जोड़ने वाले दो पैदल पुल बह गए हैं। इस कारण दो हजार की आबादी वाले इस गांव तक आवाजाही में दिक्कत आने लगी है। कई स्थानों पर पहाड़ियां दरक गईं और मलबा गांव तक पहुंच गया। सड़क मार्ग और पैदल रास्ते बंद हो चुके हैं। गांव की पेयजल लाइन टूट गई हैं।

बागेश्वर में तेज अंधड़ चला, जबकि कपकोट में एक घंटे मूसलाधार बारिश हुई। राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह ने कहा, अगले 36 घंटों में हल्की से मध्यम बारिश होने के साथ ही ओलावृष्टि की भी संभावना है।