मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सूअरों, बंदरों के कारण खेती को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए तत्परता से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सूअरों को मारने के लिए जिलाधिकारियों को लाइसेंस जारी करने को कहा है। जहां जरूरत होगी, पीएसी-पुलिस के जरिए भी सूअरों को मारा जाएगा। बंदरों को पकड़ने के लिए बड़े स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने गुलदार पकड़ने के लिए हरिद्वार में एक नया बाड़ा, लेपर्ड सफारी बनाने के भी निर्देश दिए।

शनिवार को बीजापुर अतिथि गृह में वन विभाग के साथ ही वन्य जीवों से खेती को हो रहे नुकसान के संबंध में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि जंगली सूअरों, बंदरों के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में लोग खेती से विमुख होने लगे हैं, जो चिंता का विषय है। नुकसान के कारण लोगों में नाराजगी भी है।

वनों में बड़ी मात्रा में मेहल घिघारू के पेड़ लगाने के साथ मडुआ, झंगोरा के बीज छिड़के जाएं, ताकि खाने की तलाश में जंगली जानवर आबादी की ओर न आएं। उन्होंने इस संबंध में वाइल्ड लाइफ बोर्ड के सदस्यों के साथ भी विचार विमर्श करने को कहा।

जंगल के बाहर बंदरों को पकड़ने, सूअरों को मारने मे कोई वैधानिक कठिनाई नहीं होनी चाहिए। इसके लिए पुलिस को अस्थायी लाइसेंस की व्यवस्था शीघ्र करने को कहा। इस संबंध में उन्होंने अपर पुलिस महानिदेशक पीडी रतूड़ी से भी फोन पर बात की। उन्होंने बंदरबाड़ों की स्थापना और स्टरलाइजेशन के कार्यों में तेजी लाने को कहा।

इसके लिए कैम्पा से लगभग पांच करोड़ की धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने इस क्षेत्र में कार्य कर रही स्वयंसेवी संस्थाओं से भी सहायता लेने को कहा। उन्होंने कहा कि वनों में बड़ी संख्या में टेंचेज, चालखाल और तैयार की जाए।

यह कार्य अगले 15 दिनों में शुरू हो जाए, ताकि बारिश का पानी इन स्थलों पर रुक सके। बैठक में मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, प्रमुख वन संरक्षक आरके महाजन सहित वन विभाग के अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।