दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ की प्रबंधन कमेटी के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरीश रावत सरकार को करारा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने सरकार के उन दोनों आदेशों पर अपने अगले आदेश तक रोक लगा दी है, जिनमें सरकार ने दुग्ध संघ के बोर्ड को भंग करने व नई कमेटी बनाए जाने के आदेश जारी किए थे।

इससे अब फिर से सरकार की ओर से बनाई गई प्रबंधन कमेटी के हटने से निर्वाचित समिति पर संघ का कार्यभार आ गया है। पिछले महीने शिकारपुर स्थित दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ की प्रबंधन कमेटी के दो सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था। जिससे बोर्ड को अल्पमत में मानकर सरकार ने 19 मई को बोर्ड को भंग कर दिया था।

इसके अगले ही दिन यानी 20 मई को सरकार ने केहर सिंह को संघ का चेयरमैन बनाने के साथ ही कई सदस्य नामित करने का आदेश जारी कर दिया था। इस मामले को लेकर संघ के निर्वाचित चेयरमैन डॉ. रणवीर सिंह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

चेयरमैन ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि चूंकि वह निर्वाचित चेयरमैन है, इसलिए उनका कार्यकाल पूरा हुए बिना उनको हटाया जाना किसी भी तरह से ठीक नहीं है।

अगर प्रबंधन कमेटी के सदस्यों ने इस्तीफा दिया है तो बोर्ड को भंग करने की बजाए इस्तीफा देने वाले सदस्यों का चुनाव कराकर खाली पदों को भरा जाए, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया और अपनी मनमानी करते हुए गलत आदेश जारी किया जाए। जिससे सरकार के दोनों आदेशों पर रोक लगाई जाए।

चेयरमैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अग्रिम आदेशों तक सरकार के दोनों आदेशों पर रोक लगा दी है।