गेस्ट टीचरों की दोबारा नियुक्ति के शासनादेश पर लगी रोक

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में गेस्ट टीचरों की दोबारा नियुक्ति के शासनादेश पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने प्रदेश सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश भी दिया है। अदालत की रोक से प्रदेशभर के छह हजार के करीब अतिथि शिक्षकों समेत सरकार को बड़ा झटका लगा है।

ऋषिकेश के आलोक परमार और नैनीताल निवासी ममता पंत ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि प्रदेश सरकार ने 25 मई 2016 को अतिथि शिक्षकों की पुनर्नियुक्ति को लेकर शासनादेश जारी किया है, जबकि शिक्षकों के खाली पदों पर नियुक्ति नहीं की जा रही है। पूर्व में अतिथि शिक्षकों का ब्लॉक कैडर रखा गया था, लेकिन नए  शासनादेश में ब्लॉक स्तर पर चयनित अभ्यर्थी को प्रदेश के किसी भी विद्यालय के लिए योग्य मान लिया गया है। सरकार का यह आदेश नियमसम्मत नहीं है।

एकल पीठ ने सुनवाई के बाद 25 मई के शासनादेश पर रोक लगा दी। न्यायालय ने कहा है कि सरकार ने पहले अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति को अल्पकालिक बताया था और अब शासनादेश जारी कर पुनर्नियुक्ति कर रही है। एकलपीठ ने कहा कि सरकार का यह कदम शिक्षा विभाग की ओर से न्यायालय में पूर्व में रखे गए पक्ष के विपरीत है, जिसमें शिक्षक के पदों पर स्थायी नियुक्ति की जानकारी दी गई थी।