नैनीताल अतिक्रमण मामले में डीएम दो सप्ताह में दें विस्थापन का ब्यौरा – हाईकोर्ट

नैनीताल निवासी प्रो. अजय रावत की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में लंबे समय से सुनवाई चल रही है। प्रो. रावत ने नैनीझील के जलागम क्षेत्र सूखाताल से अतिक्रमण हटाने और नगर में अवैध निर्माण पर रोक लगाने को लेकर याचिका दायर की थी। इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए झील विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने कोर्ट को बताया था कि नगर के जोन एक और दो में निर्माण की अनुमित नहीं है। इसके बावजूद यहां कई घर बने हुए हैं। इस पर कोर्ट ने करीब दो माह पूर्व अवैध निर्माणों को खाली कराने का आदेश दिया था।

नैनीताल में अतिक्रमण के मसले पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। अतिक्रमण के दायरे में आने वाले परिवारों के पुनर्वास और विस्थापन योजना पर शासन-प्रशासन की ओर से अब तक हुए प्रयासों को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की संयुक्त खंडपीठ ने नाकाफी करार देते हुए जिलाधिकारी को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत ब्यौरे के साथ शपथपत्र देने का निर्देश दिया है।

बुधवार को इस मसले पर फिर सुनवाई हुई। सरकार की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया कि प्रभावित परिवारों के विस्थापन की जद में आ रहे परिवारों के लिए नगर के आसपास जमीन तलाश ली गई है। जल्द ही पुनर्वास कार्य प्रारंभ कर लिया जाएगा। हालांकि, हाईकोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। खंडपीठ ने डीएम को दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र देने का निर्देश दिया। इसमें पुनर्वास योजना की पूरी जानकारी देने को कहा गया है।