पुलिस के घोड़े शक्तिमान की बीजेपी के एक प्रदर्शन के दौरान देहरादून में टांग टूट गई थी। इसके बाद पूरे राज्य में सियासी बवाल चरम पर पहुंच गया था। शक्तिमान को तुरंत इलाज दिया गया और मुंबई व अमेरिका से डॉक्टर उसके इलाज के लिए पहुंच गए। लेकिन सभी की किस्मत ऐसी कहां?

गऊ मां का दर्ज रखने वाली एक गाय ‘मोहिनी’ की भी टांग टूटी लेकिन किसी को कानों-कान खबर भी नहीं लगी। जिस पशुपालन विभाग को इसमें कार्रवाई करनी थी, उसे खबत तो लगी, लेकिन उन्होंने मोहिनी के दर्द को समझा ही नहीं। पैर टूटने पर लाचार पड़ी मोहिनी की पशुपालन विभाग के डॉक्टरों ने छह दिन बाद सुध ली।

स्थानीय अखबार में खबर प्रकाशित होने के बाद बुधवार को विभाग के डाक्टरों की एक टीम ने गाय का इलाज शुरू कर दिया। छह दिन तक इलाज न मिलने के कारण गाय के टूटे पैर में कीड़े पड़ गए। कीड़े पड़ने से उसका पैर सड़ने लगा। डॉक्टरों का कहना है कि मोहिनी के पेट में पल रहा बच्चा सुरक्षित है। डॉक्टरों ने बताया कि गाय का पैर ठीक नहीं हुआ तो उसको काटना भी पड़ सकता है।

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बालावाला में रहने वाले रविंद्र दत्त बहुगुणा की गाय मोहिनी का होली के दिन पैर फिसलने से पिछला पैर टूट गया था। बहुगुणा ने उसके इलाज को विभाग के अफसरों और डॉक्टरों से लगातार संपर्क किया, लेकिन उसकी एक न सुनी गई। मामला स्थानीय अखबार ने उठाया तो बुधवार को डॉक्टरों की एक टीम ने मोहिनी का इलाज शुरू किया। पहले दिन डॉक्टरों ने घाव को ड्रेसिंग कर दवा लगाकर उसे खड़ा करने की कोशिश की, लेकिन मोहिनी अभी खड़ी नहीं हो पा रही है। बताया जा रहा है कि अगर दवा से वह ठीक नहीं हुई तो उसका पैर काटना पड़ सकता है।

इलाज करने पहुंची टीम ने टूटे पैर की फोटो राजस्थान और नेपाल के एक जाने माने डॉक्टर को भेजी। डॉक्टर के अनुसार अगर पैर ठीक नहीं हुआ तो कृत्रिम पैर मंगाकर लगाया जाएगा। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश नेगी ने बताया कि गाय का इलाज रूटीन में किया जाएगा। इसके लिए एक डॉक्टर की ड्यूटी वहीं पर लगा दी गई है।

डॉक्टर सुबह शाम जाकर घाव की ड्रेसिंग करेगा। इसके अलावा टीम के डॉक्टर भी बीच-बीच में जाकर चेक अप करते रहेंगे। वहीं जयपुर के डॉ. तपेश माथुर ने बताया कि वह तीन तारीख को गाय की हालत देखने दून पहुंचेंगे। सरकार से मदद न मिलने की दशा में वह गाय के कृत्रिम पैर का खर्च वहन करेंगे।

आठ माह की गर्भवती मोहनी का होली के दिन पैर टूट गया था। तब से वह इलाज के लिए तड़प रही है। गाय को पालने वाले बालावाला निवासी रविंद्र दत्त बहुगुणा ने बताया कि सूचना देने पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राकेश नेगी पहुंचे और प्राथमिक इलाज किया। रविंद्र बहुगुणा का आरोप है कि इसके बाद से कोई डॉक्टर मोहनी का इलाज करने नहीं आया। डॉक्टर को फोन करने पर वह फोन भी नहीं उठाते।