नैनीताल में देवस्थल में स्थापित एशिया की सबसे बड़ी दूरबीन (टेलीस्कोप) को 30 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेल्जियम से बटन दबाकर एक्टीवेट करेंगे। उत्तराखंड के देवस्थल में इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।

इंजीनियरों की टीम सोमवार को देवस्थल पहुंची और दूरबीन को चालू कराने संबंधी तैयारियों का जायजा लिया। दूरदर्शन और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) की टीम भी देवस्थल पहुंच गई है। कुछ और वैज्ञानिक व इंजीनियर भी देवस्थल पहुंचने वाले हैं।

सोमवार को कंप्यूटर इंजीनियर संजीव साहू के साथ देवस्थल पहुंचे वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बृजेश कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री जिस वक्त दूरबीन को एक्टीवेट करेंगे, उस वक्त के कार्यक्रम का देवस्थल में दूरदर्शन के सहयोग से पांच मिनट का लाइव प्रसारण होगा।

गौरतलब है कि कि 2,450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित देवस्थल में साल 2007 में इस दूरबीन को लगाने का काम शुरू हुआ था। 3.6 मीटर व्यास की यह दूरबीन 360 डिग्री के कोण पर घूमकर किसी भी बिंदु पर स्थिर होकर आकाश का विस्तृत अध्ययन करने के लिए तैयार है।

इस दूरबीन की स्थापना में जर्मनी, रूस और बेल्जियम का बहुत बड़ा योगदान रहा है। इसके लैंस को तैयार करने में बेल्जियम के वैज्ञानिकों की अहम भूमिका रही है। दूरबीन में सात फीसदी अंशदान भी बेल्जियम का है।

डॉ. ब्रजेश कुमार ने बताया कि यह दूरबीन धुंधले नजर आने वाले तारों, नई आकाशगंगाओं और दूरस्थ तारों के समूह के अध्ययन में विशेष रूप से महत्वपूर्ण साबित होगी।