उत्तराखंड का सियासी संकट अब कोर्ट में पहुंच चुका है। राष्ट्रपति शासन लागू कर चुकी केंद्र सरकार अब पीछे हटने को तैयार नहीं है। बताया जा रहा है कि केंद्र भी पूरी ताकत झोंकने का मन बना चुका है।

29 मार्च को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने आदेश दिया कि 31 मार्च को सदन में वोटिंग कराई जाए। शक्ति परीक्षण कराने के आदेश को केंद्र डबल बेंच में चुनौती देने को तैयार है। याचिका भी तैयार कर ली गई है।

बुधवार को याचिका पर सुनवाई हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि याचिका पर बहस के लिए अटॉर्नी जनरल भारत सरकार मुकुल रोहतगी बहस करेंगे। उनका नैनीताल पहुंचने का कार्यक्रम है।

माना जा रहा है कि गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी अटॉर्नी जनरल के साथ नैनीताल पहुंच सकते हैं। बता दें कि अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता और अधिवक्ता नलिन कोहली को भी नैनीताल भेजा गया है।

बता दें कि उत्तराखंड में 70 विधायकों में 36 कांग्रेस के विधायक हैं। इनमें से 9 बागी हो गए हैं। बीजेपी के 27 विधायक हैं। एक विधायक बीजेपी से निष्कासित हैं। तीन निर्दलीय विधायक हैं, 2 बीएसपी के विधायक हैं। एक उत्तराखंड क्रांति दल का विधायक है।

ऐसे में साफ है कि 31 मार्च को हरीश रावत की अग्निपरीक्षा है और उन्हें विधानसभा में बहुमत हासिल करना होगा। सूत्रों के अनुसार उत्तराखंड हाइकोर्ट की सिंगल बेंच द्वारा हरीश रावत सरकार को बहुमत परीक्षण का मौका दिए जाने के फैसले को केंद्र सरकार डबल जज वाले बेंच के सामने चुनौती देगी।

बीजेपी के एक सूत्र ने कहा कि यह मामला शुद्ध रूप से तकनीकी और कानूनी लगता है। मंगलवार के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में या उसी हाईकोर्ट की किसी बड़ी पीठ में चुनौती दी जा सकती है।

सूत्र ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि उन्हें इस मुद्दे पर कोई अंतिम निर्णय लेने के लिए कोर्ट के आदेश की प्रति का इंतजार है। अपदस्थ मुख्यमंत्री हरीश रावत की एक याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य विधानसभा में बहुमत का फैसला होने तक राज्य में राष्ट्रपति शासन जारी रखने की अनुमति दे दी।

कोर्ट ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अयोग्य ठहराए गए सभी नौ विधायकों को मतदान में हिस्सा लेने की अनुमति होगी। कोर्ट ने कहा कि मतदान का परिणाम शुक्रवार को अदालत में पेश किया जाए। कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को विधानसभा में एक पर्यवेक्षक के रूप में उपस्थित रहने का आदेश दिया।

इस बीच संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा कि फैसले का पूरा विवरण देखे बगैर, कोई टिप्पणी करना अनुचित होगा, लेकिन हाईकोर्ट के पास कांग्रेस के नौ बागी विधायकों के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष के आदेश को स्थगित करने या रद्द करने का अधिकार है।

कश्यप ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के आदेश पर रोक लगाने या उसे रद्द किए बगैर अयोग्य ठहराए गए विधायक विश्वास मत में हिस्सा नहीं ले सकते। बीजेपी के कई विधायकों ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में कुछ गड़बड़ है।