उत्तराखंड में फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपना रही है बीजेपी

बीजेपी उत्तराखंड में ‘देखो और प्रतीक्षा करो’ की रणनीति अपना रही है, जहां रविवार को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया और राज्य में सत्तारूढ़ रही पार्टी कांग्रेस ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी है। कांग्रेस के नौ विद्रोही विधायकों ने उन्हें अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ कानूनी रास्ता अख्तियार किया है।

बीजेपी ने पिछले हफ्ते भरोसा जताया था कि वह राज्य में सरकार बनाएगी, क्योंकि कांग्रेस बहुमत को साथ रखने के लिए संघषर्रत है। लेकिन बीजेपी को समर्थन दे रहे विद्रोही विधायकों को अयोग्य ठहराने के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले ने उनकी योजना में अवरोध खड़ा कर दिया है।

पार्टी सूत्रों ने कहा कि कोई फैसला करने से पहले वे प्रतीक्षा करेंगे कि इस मामले में अदालत में क्या प्रगति होती है। उन्होंने कहा, ‘यह अब सिर्फ राजनीतिक मामला ही नहीं है क्योंकि अब अदालत का भी रुख होगा। हमें प्रतीक्षा करनी होगी।’

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोमवार को नैनीताल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाने तथा उनकी सरकार बहाल किए जाने का अनुरोध किया। बीजेपी के मीडिया प्रभारी श्रीकांत शर्मा ने कांग्रेस के इस आरोप को खारिज कर दिया कि केंद्र ने राज्य में ‘लोकतंत्र की हत्या’ कर दी।

उन्होंने कहा कि इसकी ‘हत्या’ 18 मार्च को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा की गई थी, जब उन्होंने एक ‘असफल’ विधेयक को पारित घोषित कर दिया, जबकि बहुमत में विधायकों ने अपना हाथ इसके खिलाफ उठाया था।

श्रीकांत तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत से जुड़े कथित ‘स्टिंग ऑपरेशन’ का भी जिक्र किया और कहा कि इस संकट के लिए अगर कोई जिम्मेदार है तो यह कांग्रेस नेतृत्व है।