उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने रविवार को कहा कि हरीश रावत सरकार सत्ता में बने रहने के वास्ते बहुमत साबित करने का अधिकार गंवा चुकी थी। कोश्यारी ने राज्य के इस राजनीतिक संकट में राज्यपाल के.के. पॉल की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

कोश्यारी ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगने के कुछ ही मिनट बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘…उस दिन विधानसभा में 70 में से 68 सदस्य मौजूद थे, जिनमें से 37 ने सरकार के खिलाफ वोट दिया था। इसका तात्पर्य है कि सरकार गिर गई और वह सत्ता में बने रहने का अधिकार भी खो बैठी। बाद में चार विधायकों ने सदन के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए सचिव को लिखा।’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार उसके कुछ विधायकों के बगावत करने के बाद 18 मार्च को ही गिर गई थी।

कोश्यारी ने कहा, ‘हमने राज्यपाल के सामने यह मुद्दा उठाया था और उनसे कानून के अनुसार सरकार को तत्काल बर्खास्त करने का अनुरोध किया था।’ उन्होंने दावा किया, ‘हम राज्यपाल से न्याय की आस कर रहे थे। लेकिन सरकार बर्खास्त करने के बजाय, राज्यपाल ने बहुमत साबित करने के लिए 10 दिन का समय देकर सरकार बचाने की कोशिश की। जो विधानसभा के नियमों एवं विनियमों के खिलाफ था। यदि वह निष्पक्ष होते तो वह राज्य में तत्काल सरकार को निलंबित करते और राष्ट्रपति शासन लगाते।’