बीजेपी एक हफ्ते में दूसरी बार उत्तराखंड की राजनीतिक लड़ाई को शनिवार को राष्ट्रपति के पास ले गई और राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग करते हुए कहा कि उस ‘स्टिंग ऑपरेशन’ के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है जिसमें उन्हें कथित तौर पर सौदेबाजी करते दिखाया गया है।

राष्ट्रपति को सौंपे गए बीजेपी के ज्ञापन में राज्यपाल के.के. पॉल की भी आलोचना की गई। इसमें कहा गया है कि उन्होंने ‘विधानमंडल में बहुमत वाले पक्ष के राज्य सरकार को बर्खास्त करने के आग्रह को स्वीकार नहीं किया और इसके विपरीत 10 दिनों का समय दे दिया’ ताकि रावत अपना बहुमत साबित कर सकें।

इसमें आरोप लगाया गया है कि इतना समय दिए जाने से मुख्यमंत्री को अवैध, असंवैधानिक प्रथाओं में शामिल होने का मौका मिला। इनमें अल्पमत को बहुमत में बदलने के लिए खरीद-फरोख्त का प्रयास भी शामिल है।

बीजेपी नेताओं के एक शिष्टमंडल ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की और आशंका जतायी कि कांग्रेस सरकार सदन में बहुमत साबित करने के लिए विद्रोही विधायकों को अयोग्य ठहराने की खातिर विधानसभा अध्यक्ष के पद का ‘दुरुपयोग’ कर सकती है।

बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा कि स्टिंग के बाद विधानसभा में शक्ति परीक्षण की कोई आवश्यकता नहीं है और राज्य में संवैधानिक संकट कायम है।

उन्होंने कहा, ‘भले ही, सरकार कुछ विधायकों को अयोग्य ठहराकर सदन में बहुमत साबित कर दे, यह लोकतंत्र की हत्या होगी। वे अल्पमत सरकार को बहुमत में बदलने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय का दुरुपयोग कर सकती है।’ उन्होंने कहा, ‘हमने राष्ट्रपति से कहा कि स्टिंग के बाद, राज्य सरकार को सत्ता में एक मिनट भी रहने का अधिकार नहीं है। आपको जरूरी कदम उठाने चाहिए और राष्ट्रपति शासन लगाना चाहिए।’

बीजेपी प्रतिनिधिमंडल में विजयवर्गीय के अलावा पार्टी उपाध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे और श्याम जाजू, महासचिव अनिल जैन, राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा और सांसद भगत सिंह कोशियारी भी शामिल थे। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि बीजेपी विधायक भीमलाल आर्य को ‘अवैध रूप से बंदी’ बनाया गया है।

इसके पहले दिन में एक संवाददाता सम्मेलन में बीजेपी ने राज्य सरकार को बर्खास्त करने की मांग की ताकि सत्ता के दुरुपयोग को रोका जा सके।

पार्टी ने कांग्रेस के इन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि राज्य सरकार को गिराने से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल है। उन्होंने कहा कि यह संवैधानिक संकट कांग्रेस की आंतरिक खींचतान का नतीजा है।