रविवार की सबसे बड़ी खबर यही है कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है। राष्ट्रपति भवन से इस बात की पुष्टि भी कर दी गई है। केंद्र सरकार ने शनिवार रात राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की थी और रविवार दोपहर को राष्ट्रपति ने इस पर दस्तखत कर दिए हैं। जल्द ही इस मामले में अधिसूचना भी जारी कर दी जाएगी। बता दें कि सोमवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत को विधानसभा में बहुमत साबित करना था।

बागी विधायक पहले दिन से ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग कर रहे थे। पूर्व मुख्यमंत्री और बागी विधायक विजय बहुगुणा ने राष्ट्रपति शासन को न्याय संगत बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संविधान के अनुरूप नहीं चल रही थी, इसी लिए संविधान में यह धारा रखी गई थी। उन्होंने कहा कि 35 विधायक उनके खिलाफ थे, इसके बावजूद हरीश रावत बहुमत का दावा कर रहे थे, इससे बड़ा मजाक कुछ नहीं हो सकता। ये सरकार राज्य को गर्त में ले जा रही थी। हम केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने का स्वागत किया। उन्होंने कहा, विधानसभा अध्यक्ष ने अपने कर्तव्यों का पालन सही से नहीं किया। सरकार बनाने के लिए बीजेपी का समर्थन करने के सवाल पर बहुगुणा ने कहा कि राज्य के हित में है कि वहां सरकार बने। लेकिन ज्यादा जरूरी यह था कि हरीश रावत की सरकार का खात्मा हो। उन्होंने एक बार फिर राज्यपाल केके पॉल पर हमला किया।

बहुगुणा ने कहा कि जानबूझ कर हरीश रावत को बहुमत साबित करने के लिए ज्यादा वक्त दिया गया, अगर 25 तारीख से पहले बहुमत साबित करने को कहा जाता तो उनका पूरा सम्मान था। इसके अलावा बहुगुणा ने कहा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन संविधान के तहत ही लगाया गया है, इसमें सत्ता के दुरुपयोग का कोई मामला नहीं है।

कुंवर प्रणव चैंपियन के राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए राष्ट्रपति और केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि हमारे नेता विजय बहुगुणा हैं और जो वो फैसला वे करेंगे हम भी वही करेंगे। कांग्रेस में रहने या बीजेपी में जाने के सवाल पर प्रणव चैंपियन ने कहा कि विजय बहुगुणा ही हमारे नेता हैं और वही फैसला लेंगे।

बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय का कहना है कि अगर मौका मिला तो बीजेपी राज्य में सरकार बना भी सकती है। बीजेपी श्याम जाजू ने कहा कि उत्तराखंड को इस संकट से निकालने के लिए हमने कल शाम राष्ट्रपति से मिलकर वहां राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की घी। उन्होंने कहा, तत्काल जरूरत यह थी कि राज्य को इस राजनीतिक संकट से बचाने की जरूरत थी।

उत्तराखंड में मचे सियासी बवाल के बीच शनिवार रात अचानक केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई और राष्ट्रपति शासन की अनुशंषा कर दी गई थी, हालांकि शनिवार रात इस बारे में कुछ नहीं बताया गया था। रविवार दोपहर को राष्ट्रपति ने इस पर दस्तखत कर दिए।

इससे पहले राज्यपाल ने शनिवार शाम को केंद्रीय गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें उन्होंने संवैधानिक संकट होने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि राज्य में खुलेआम विधायकों की खरीद फरोख्त हो रही है, इसलिए यहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाए।