सरकार ने कईयों बार सामने आकर लाखों दावे किए कि साल 2013 की आपदा में मृत लोगों के सभी शवों को निकाल लिया गया है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

केदारनाथ यात्रा के अहम पड़ाव गौरीकुंड में मानव कंकालों का मिलना अब भी जारी है। यह भी तब है, जब यात्रा को एक महीने का समय शेष रह गया है। ऐसे में स्थानीय लोगों में सरकार और शासन-प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश व्याप्त है।

बता दें कि 16/17 जून 2013 की भयावह जल आपदा ने केदारनाथ से लेकर तिलवाड़ा कस्बे तक भारी तबाही मचाई थी। इस घटना ने जहां पूरे देश को हिलाकर रख दिया था, वहीं हजारों लोग इसका शिकार भी हुए थे।

घटना के बाद कई बार राहत अभियान के जरिए शवों को निकालने का प्रयास किया गया और काफी हद तक सरकार को सफलता भी मिली, लेकिन केदारनाथ यात्रा के मुख्य पड़ाव गौरीकुंड की सुध न ही सरकार ने ली और न ही शासन-प्रशासन का ध्यान इस ओर गया।

यहां तक की बद्री-केदार मंदिर समिति ने भी इस ओर से मुंह फेरे रखा और आज स्थिति यह है कि आपदा के ढाई साल से अधिक समय बाद भी गौरीकुंड के तर्पण कुंड में मानव कंकाल दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें निकालने की जहमत भी प्रशासन नहीं उठा रहा है।

स्थानीय लोग कई बार प्रशासन को कह चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई आज तक नहीं हुई है। उनकी मानें तो तप्त कुंड में सैकड़ों की संख्या में लोग तर्पण करते थे। आपदा के दौरान कई लोग तर्पण कुंड के भीतर ही दब गए, जिन्हें बाहर निकालने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया।

तर्पण कुंड के चारों ओर झाड़ियां उगी हुई हैं और शव दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों की आस्था के साथ कुठाराघात किया जा रहा है। प्रधान राकेश प्रसाद गोस्वामी, व्यापार संघ अध्यक्ष कुलानंद गोस्वामी, श्रीधर प्रसाद, जगन्नाथ गोस्वामी ने कहा कि आपदा के ढाई साल गुजर जाने के बाद भी गौरीकुंड की कोई सुध नहीं ली गई है।

सरकार का पूरा ध्यान केदारनाथ पर है। इसके अलावा किसी भी यात्रा पड़ाव पर व्यवस्थाएं आज भी सुदृढ़ नहीं हो पाई है। केदारनाथ यात्रा के मुख्य पड़ाव गौरीकुंड की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। यहां तक की क्षेत्रीय विधायक भी गौरीकुंड से मुंह मोड़े हुए हैं। तर्पण कुंड में मानव कंकाल दिखाई दे रहा है और अब भी कई शव तर्पण कुंड में होने की संभावनाएं बनी है।

यात्रा से पूर्व इस तर्पण कुंड में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु तर्पण कराते थे, लेकिन आपदा के बाद प्रशासन और सरकार ने तर्पण कुंड की कोई सुध नहीं ली, जिससे आज इसके चारों ओर झाड़ियां उग आई हैं और पूरा कुंड मलबे से अटा पड़ा है। प्रशासन को खबर करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में बड़ा सवाल यह भी कि जिस तर्पण कुंड से श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है, उसके सौंदर्यीकरण तक के लिए सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है।