उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के बाद एक बार जहां बीजेपी और केंद्र सरकार का कहना है कि उन्होंने संवैधानिक संकट को खत्म किया है। वहीं कांग्रेस और हरीश रावत ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताया है। इस बीच माना जा रहा था कि कांग्रेस के बागी 9 विधायकों को साथ लेकर बीजेपी उत्तराखंड में आगे चलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है। लेकिन इससे पहले कि राष्ट्रपति शासन से संबंधित पत्र विधानसभा अध्यक्ष के पास पहुंचता उन्होंने सभी बागी विधायकों की सतस्यता ही रद्द कर दी।

बागी विधायकों की सदस्यता रद्द होने के बाद एक बार फिर उत्तराखंड में सरकार गठन की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। जानकार तो इस बारे में कांग्रेस के बागी नेताओं और बीजेपी के मंसूबों पर पानी फिरने की बात भी कर रहे हैं।

विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने बागी विधायक पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, कृषि मंत्री हरक सिंह रावत, पूर्व उद्यान मंत्री अमृता रावत, विधायक शैलारानी रावत, प्रदीप बत्रा, कुंवर प्रणब सिंह चैंपियन, सुबोध उनियाल, डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल और उमेश शर्मा काउसभी की सदस्यता रद्द कर दी है। बागी विधायकों की सदस्यता रद्द होने और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद उत्तराखंड का राजनीतिक भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है।

बागी विधायकों की सदस्यता रद्द होने के बाद अगर कांग्रेस को पीडीएफ का समर्थन मिल जाता है और केंद्र राष्ट्रपति को इस बात का भरोसा हो कि वहां सरकार बन सकती है तो एक बार फिर हरीश रावत राज्य के मुख्यमंत्री बन सकते हैं और सरकार अपना बाकी का कार्यकाल पूरा कर सकती है।