बीजिंग।… नेपाल ने काठमांडू में एक मोनोरेल नेटवर्क बनाने और एक तिब्बती शहर से बुद्ध के जन्म स्थान लुंबिनी तक रेल पटरी बिछाने में चीन से सहायता मांगी है। नेपाल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

नेपाली प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के विदेश मामलों के सलाहकार गोपाल खनल ने जापानी समाचार एजेंसी क्योदो न्यूज को बताया, ‘दोनों देश नेपाल में रेलवे के निर्माण के लिए भी सहमत हुए हैं।’ हफ्ते भर की यात्रा पर बीजिंग पहुंचे ओली ने अपने चीनी समकक्ष ली केकियांग के साथ बैठक में 10 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें एक ऐतिहासिक पारगमन (ट्रांजिट) संधि भी शामिल है, जिसका उद्देश्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए भारत पर निर्भरता को खत्म करना है।

खनल ने बताया कि नेपाल ने काठमांडू में मोनोरेल का निर्माण करने और चीन के ग्यीरोंग से लुंबिनी तक एक रेल संपर्क के निर्माण में सहायता मांगी है। साल 2020 तक चीन की योजना नेपाल की सीमा से लगे ग्यीरोंग तक अधिक उंचाई वाले किंघाई..तिब्बत रेल को विस्तारित करने की है।

विदेश मंत्रालय के एशिया विभाग में उप-महानिदेशक होउ यांकी ने बताया कि सोमवार को ओली ने चीनी प्रधानमंत्री ली के साथ मुलाकात में चीन के लिए दो रेल परियोजनाओं का प्रस्ताव किया। उन्होंने बताया कि पहली परियोजना नेपाल के शहरों को जोड़ने की है, जबकि दूसरी परियोजना सीमा पार रेलवे संपर्क की है। इस सिलसिले में ओली को चीन से सकारात्मक जवाब मिला और दोनों देश जल्द ही इस पर एक व्यवहार्यता अध्ययन करने को राजी हुए हैं।

खनल ने ट्रांजिट संधि को नेपाल सरकार के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि यह संधि नेपाली लोगों के विश्वास को काफी बढ़ाएगी। अब तक नेपाल कोलकाता बंदरगाह के जरिए तीसरे देशों से व्यापार करता रहा है। जापानी एजेंसी की खबर में कहा गया है कि ओली की फरवरी की यात्रा में भारत ने दूसरे बंदरगाह, विशाखापट्टनम तक पहुंच देने की पेशकश की थी। इस कदम को काठमांडू में यह समझा गया कि नेपाल को चीनी क्षेत्र के जरिए संपर्क हासिल करने से दूर रखने के लिए भारत यह कोशिश कर रहा है।