उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी भी मुख्यमंत्री हरीश रावत के समर्थन में उतर आए हैं। तिवारी का कहना है कि वे 31 मार्च तक दिल्ली में हैं और अगर उनका सहयोग चाहिए तो वह यह सहयोग करने को भी तैयार हैं।

इसके साथ ही तिवारी ने मुख्यमंत्री हरीश रावत को भी बिना भेदभाव के हर विधायक के क्षेत्र में विकास करने की सलाह दी है। बहरहाल, वयोवृद्ध नेता का यह रुख मुख्यमंत्री हरीश रावत को राहत देने वाला साबित भी हो सकता है।

तिवारी की ओर से जारी पत्र में उत्तराखंड में उपजे सियासी संकट पर चिंता जाहिर की गई है। तिवारी का कहना है कि उत्तराखंड में चुनी गई सरकार को उसका कार्यकाल हर हाल में पूरा करने दिया जाए और नियत समय पर ही चुनाव हों।

तिवारी ने सरकार की स्थिरता पर जोर दिया और कहा कि राज्य का विकास तभी संभव है जब वहां एर स्थिर सरकार हो। इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए एनडी तिवारी ने कहा कि राज्य का हर विधायक उनके संपर्क में है।

वे 31 मार्च तक दिल्ली में हैं और अगर उनका सहयोग लिया जाएगा तो वे इस संकट का समाधान करने में सहयोग करने को भी तैयार हैं। हालांकि, हरीश रावत के साथ पहले तिवारी की पटरी कम ही बैठा करती थी।

तिवारी के मुख्यमंत्री रहते हुए हरीश रावत कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी रहे और तिवारी लगातार हरीश रावत से परेशानी की शिकायत भी करते रहे। हाल ही में तिवारी हल्द्वानी में विकास के मामले को लेकर धरने पर बैठ गए थे।

उस समय रातों-रात हरीश रावत के साथ ही हरक सिंह को भी सक्रिय होना पड़ा था। पर बदले हुए समीकरण में तिवारी ने हरीश रावत का साथ देने का ऐलान कर मुख्यमंत्री हरीश रावत को संकट की घड़ी में सहारा दिया है।

इसके साथ ही तिवारी ने हरीश रावत को नसीहत भी है। तिवारी ने कहा है कि राज्य का मुखिया होने के नाते मुख्यमंत्री को हर विधायक के क्षेत्र में बिना भेदभाव के विकास कार्य कराने चाहिए। गौरतलब है कि बागी विधायकों का भी आरोप है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत उनके क्षेत्रों के विकास के कामों को तवज्जो नहीं दे रहे हैं।

बीजेपी ने भी सदन में मुख्यमंत्री हरीश रावत पर विपक्ष के विधायकों की उपेक्षा का आरोप लगाया था। उस समय बाकायदा एनडी तिवारी का नाम लिया गया था और कहा गया था कि तिवारी विपक्ष के विधायकों की मांगों को कभी नजरअंदाज नहीं करते थे।