रक्षा मंत्रालय ने एशिया-प्रशांत में द्वीप क्षेत्रों को लेकर जारी संघर्ष से क्षेत्र के लिए एक सुरक्षा खतरा होने का जिक्र करते हुए कहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी सेना ने नियमित गश्त के दौरान अड़ियल रुख बढ़ाया है।

राजधानी दिल्ली में जारी अपनी सालाना रिपोर्ट में मंत्रालय ने यह भी कहा कि दक्षिण कश्मीर में कट्टरपंथ को बढ़ावा मिलना और ताजा भर्तियां चिंता का कारण है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बदलते हालात सहित बाहरी कारक भी जम्मू-कश्मीर में आंतरिक सुरक्षा पर भी प्रभाव डाल सकता है।

इस बात का जिक्र किया गया है कि भारत का सुरक्षा माहौल क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर एक जटिल मुद्दा तथा चुनौती रखता है। इसमें करीबी और विस्तारित पड़ोस के हिस्सों में अस्थिरता एवं अशांति के परिणामों का हल करने के लिए तैयारी बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया है। इसे एक अहम प्राथमिकता बताया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक साथ ही अंतरराष्ट्रीय शांति एवं स्थिरता बढ़ाने के लिए कई सारे मित्र राष्ट्रों के साथ मजबूत रक्षा साझेदारी बनाने की नवीनीकृत और सफल कोशिशें की गई हैं।

मंत्रालय ने चीन या अमेरिका का नाम लिए बगैर कहा कि हाल ही में एशिया प्रशांत क्षेत्र में दिखे शक्ति वैश्विक संतुलन में बदलाव ने बड़ी शक्तियों और क्षेत्रीय देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक वार्ताओं में नए आयाम पेश किए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि खास तौर पर एशिया प्रशांत में द्वीप क्षेत्रों को लेकर जारी संघर्ष ने क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाया है जो सहयोगात्मक ढांचे को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

एलएसी पर हालात के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-चीन सीमा शांतिपूर्ण बनी रहेगी। इसने कहा है कि सीमा पर कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारत और चीन के एलएसी पर अलग विचार हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देश एलएसी पर अपने दावे वाले क्षेत्रों में गश्त करते हैं और इसके चलते एक-दूसरे की सीमा के अंदर घुस जाते हैं। हालांकि पीएलए (चीनी सेना) द्वारा नियमित गश्त के दौरान अड़ियल रुख बढ़ा है।