राजनीतिक चर्चा में राष्ट्रवाद के मुद्दे के हावी होने के बीच बीजेपी ने भगत सिंह की शहादत की याद में मंगलवार को तीन दिनों के कार्यक्रम की घोषणा की। यही नहीं कांग्रेस सांसद शशि थरूर द्वारा जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की तुलना शहीद-ए-आजम से किए जाने को लेकर पार्टी पर हमला भी बोला।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने मांग की कि कांग्रेस और थरूर को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी ने भले ही सांसद के बयान से अपने को अलग कर लिया हो, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है क्योंकि उन्होंने इसे वापस नहीं लिया है और न ही अफसोस जताया है।

उन्होंने पार्टी ब्रीफिंग में संवाददाताओं से कहा, ‘कांग्रेस क्या कर रही है? 12 सालों तक उसने नरेंद्र मोदी का विरोध किया, दो साल तक उसने विकास (पीएम मोदी के तहत) का विरोध किया, उसके बाद उसने जेएनयू में भारत विरोधी नारों को मान्यता दी और अब शहीदों का अपमान राहुल गांधी के तहत कांग्रेस की पहचान बन गई है।’

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने उनके शहादत दिवस के दो दिन पहले उनका अपमान किया। वह ब्रिटिश शासकों द्वारा 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को फांसी दिए जाने का जिक्र कर रहे थे। जावडेकर ने आरोप लगाया कि थरूर ने केरल विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ऐसा कहा।

उन्होंने कहा कि देशभर में बीजेपी नेता बुधवार को तीनों शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे, उसके अगले दिन होली पर भगत सिंह के पसंदीदा गीत ‘रंग दे बसंती चोला’ गाएंगे और आखिरी दिन ‘शहीदों का अपमान करने वाली मानसिकता’ का पुतला फूंकेंगे।

जावडेकर ने कहा कि इस घटना को लेकर देशभर में लोगों के बीच ‘रोष’ है और बीजेपी इस कार्यक्रम के जरिए इसे व्यक्त करेगी। असम चुनाव में कुछ कांग्रेस नेताओं द्वारा कन्हैया के पोस्टरों का उपयोग किए जाने की रिपोर्टों का जिक्र करते हुए जावड़ेकर ने कहा कि यह दर्शाता है कि विपक्षी पार्टी के पास कोई ‘रोल मॉडल’ नहीं रह गया है और ‘उधार ली गई तस्वीरों’ पर निर्भर हैं।

‘उनके रोल मॉडल नाकाम रहे हैं। यह कांग्रेस का राजनीतिक दिवालियापन है।’ उन्होंने कहा कि जेएनयू नेता और भगत सिंह के बीच कोई तुलना नहीं हो सकती, क्योंकि कन्हैया कुमार पर उस अफजल गुरू को महिमामंडित करने का आरोप है जो संसद पर हमला मामले में विदेशी आतंकवादियों को मदद करने का दोषी था, जबकि भगत सिंह ने विदेशी शासकों के खिलाफ अपने संघर्ष में फांसी को चुना था।