कांग्रेस के बागी विधायक और विधानसभा के पूर्व प्रोटेम स्पीकर शैलेंद्र मोहन सिंघल का दावा है कि राज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष के ‘कारण बताओ नोटिस’ को ‘नल एंड वॉइड’ घोषित कर दिया है। इसलिए अब सभी नौ बागी विधायकों की विधानसभा की सदस्यता सुरक्षित है।

हालांकि कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदयेश ने बागी विधायकों के इस दावे को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल जो भी आदेश देते हैं उसे सरकार के माध्यम से दिया जाता है और यह आदेश मुख्यमंत्री के मार्फत आता है। उन्होंने बागियों पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।

बागी विधायकों के दावे के मुताबिक स्पीकर ने 26 मार्च तक स्पष्टीकरण का जो ‘कारण बताओ नोटिस’ दिया है, अब राज्यपाल के हस्तक्षेप के कारण वह खारिज हो चुका है। सिंघल ने दावा किया है कि राज्यपाल ने स्पीकर को चिट्ठी लिखकर बागी विधायकों के खिलाफ एंटी डिफेंक्शन में कार्रवाई न करने की बात कही है।

बागी विधायकों के इस दावे पर यकीन किया जाए तो यह अपने आप में एक बड़ा घटनाक्रम है। सभी असंतुष्ट विधायक 28 मार्च को विधानसभा में सरकार के खिलाफ वोटिंग के लिए तैयार हैं। एक न्यूज चैनल से बात करते हुए असंतुष्ट विधायकों ने यह दावा किया है।

असंतुष्ट विधायक हरक सिंह रावत का कहना है कि हरीश रावत सरकार ‘चिट भी मेरी और पट भी मेरी’ चाहती है, यह नहीं चलने दिया जाएगा। बागी विधायक हरक सिंह रावत ने कहा है कि सभी 9 विधायक आज भी अपने स्टैंड पर कायम है। हमको लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। असंतुष्ट विधायक उमेश शर्मा ने गढ़वाल और कुमाऊं का दांव खेला। उन्होंने कहा, मेरे क्षेत्र की उपेक्षा बिल्कुल बर्दास्त नहीं करूंगा।