चीन ने नेपाल के आंतरिक मामलों में गैर-दखलअंदाजी का वादा किया जबकि लैंडलॉक नेपाल की भारत पर पूर्ण निर्भरता खत्म करने के लिए दोनों पक्षों ने ऐतिहासिक ट्रांजिट संधि सहित 10 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। चीन कनेक्टिविटी के संवर्धन के लिए रणनीतिक रेल लिंक का नेपाल तक विस्तार करने पर राजी हो गया है।

भारत की हाल की अपनी यात्रा के बाद चीन की अपनी पहली यात्रा पर रविवार को बीजिंग पहुंचे नेपाली प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने चीन के प्रधानमंत्री ली केक्यांग से व्यापक वार्ता की और राष्ट्रपति शी चिंनफिंग से भी भेंट की।

ली ने कहा, ‘चीन नेपाल की अपनी संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की सुरक्षा करने की कोशिश तथा नेपाल की जनता का विकास पथ को चुनने का प्रबल समर्थन करता है तथा वह नेपाल के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।’ उन्होंने नेपाल की हाल की संवैधानिक प्रक्रिया की भी प्रशंसा की, जिसने देश में एक बड़े राजनीतिक संकट को जन्म दिया था।

नेपाल के प्रति ली का जबर्दस्त समर्थन भारतीय मूल के मधेसियों की महीनों की नाकेबंदी की वजह से भारत के साथ संबंधों में उत्पन्न खटास के बीच आया है। मधेसी हाल में बने नए संविधान में पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संघीय सीमाओं के पुनर्गठन सुनिश्चित करने संविधान की मांग कर रहे हैं।

सरकारी संवाद समिति शिन्हुआ के अनुसार ली ने यह भी वादा किया कि चीन नेपाल के साथ कनेक्टिविटी, औद्योगिक क्षमता, तेल एवं गैस, व्यापार, पर्यटन, कानून प्रवर्तन समेत अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएगा।

वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने ट्रांजिट संधि समेत 10 समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही काठमांडू से आ रही इन खबरों पर पूर्ण विराम लग गया कि ओली इस संधि को टाल सकते हैं। इस बहुप्रचारित ट्रांजिट व्यापार संधि से नेपाल की भारत पर पूर्ण निर्भरता खत्म होगी।

उन्होंने मुक्त व्यापार क्षेत्र (एफटीए) पर व्यावहारिकता अध्ययन के लिए सहमति पत्र पर भी हस्ताक्षर किए। एक सरकारी बयान के अनुसार इसके तहत दोनों देश साझा चिंता से जुड़े क्षेत्रों पर शोध के लिए एक कार्यबल बनाएंगे। एफटीए से द्विपक्षीय व्यापार और निवेश बढ़ेंगे।

चीन की सात दिवसीय यात्रा पर रविवार को बीजिंग पहुंचने पर ओली का यहां ली ने ग्रेट हॉल ऑफ पीपुल में भव्य स्वागत किया।

ओली की यह उच्च स्तरीय यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब नेपाल हाल की छह महीने की नाकेबंदी की पुनरावृति के भय के बीच चीन से और आपूर्ति मांगों की मांग कर रहा है।

दरअसल भारतीय मूल के मधेसियों ने भारत से आने वाले नेपाल के व्यापारिक मार्गों को करीब छह माह तक बंद कर दिया था, जिससे नेपाल का जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया था।

काठमांडू में नेपाल के विदेश मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार द्विपक्षीय रिश्ते की दिशा पर संतोष प्रकट करते हुए दोनों प्रधानमंत्रियों ने परस्पर विश्वास और आपसी समझ मजबूत बनाने तथा विविध क्षेत्रों में परस्पर लाभकारी सहयोग को बढ़ावा देने पर विचार विमर्श किया।

विज्ञप्ति के अनुसार वार्ता के दौरान व्यापार में विविधता, सीमापार कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचा विकास, ऊर्जा, पर्यटन, वित्त, शिक्षा और संस्कृति पर सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। ली के साथ अपनी बातचीत के दौरान ओली ने तिब्बत के रास्ते चीन के रणनीतिक रेल लिंक को नेपाल तक बढ़ाने का विचार रखा।

ली-ओली वार्ता के बाद मीडिया को ब्रीफ करते हुए चीन विदेश मंत्रालय की उपप्रमुख हाउ यांकी ने कहा, ‘नेपाल के प्रधानमंत्री दो रेल लाइनों की संभावनाएं खंगालना चाहते थे।’ हाउ ने कहा कि सरकार चीनी कंपनियों को आतंरिक रेल योजना पर गौर करने के लिए प्रोत्साहित करेगी और यह भी कि चीन पहले से ही रेलवे को तिब्बती शहर शिगात्से से नेपाल सीमा पार गायरोंग तक बढ़ाने की योजना बना रहा है।

उन्होंने कहा, ‘वाकई, गायरोंग से (रेल का) और विस्तार दीर्घावधि योजना है। यह भौगोलिक और तकनीकी स्थितियों, वित्तीय योग्यता पर निर्भर करता है। हमारा विश्वास है कि निकट भविष्य में दोनों देश रेल से जुड़ जाएंगे।’ चीन से दो रेल लिंकों का ओली का अनुरोध ऐसे समय में आया है जब चीन तिब्बत में दुनिया की सबसे ऊंची रेल लाईन का सफलतापूर्वक संचालन कर रहा है।

ट्रांजिट संधि के बारे में पर्यवेक्षकों का कहना है कि वैसे तो यह नेपाल के लिए यह नई द्वार उपलब्ध कराएगा और नाकेबंदी के दौरान पहले ही उसे चीन से 1000 एमटी पेट्रोलियम उत्पाद मिला था, लेकिन इसे सबसे महंगे प्रस्ताव के रूप में देखा जा रहा है। क्योंकि जीसों की आपूर्ति तिब्बत की दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों के मार्फत होनी होगी।