उत्तराखंड का सियासी संकट विधानसभा से राजभवन होते हुए अब दिल्ली में राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गया है। सोमवार शाम बीजेपी प्रतिनिधि मंडल राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने पहुंचा। बीजेपी ने राष्ट्रपति से मिलकर उत्तराखंड की हरिश रावत सरकार को बर्खास्त करने की मांग की। इस बीच कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने बयान दिया है कि बीजेपी ने हमारे विधायकों को किडनैप किया है और हम 28 मार्च को उत्तराखंड में बहुमत साबित करेंगे।

बीजेपी प्रतिनिधि मंडल में उत्तराखंड के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय और प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, बीजेपी के 6 सासंद और पार्टी के 26 विधायक शामिल थे, लेकिन इसमें 9 कांग्रेस के बागी विधायक शामिल नहीं थे, जिनके बारे में दावा किया जा रहा था कि ये सभी साथ में होंगे। उनके ठीक बाद कांग्रेस का प्रतिनिधि मंडल भी राष्ट्रपति से मुलाकात करके अपना पक्ष रखने के लिए पहुंचा।

पहले कहा जा रहा था कि खुलकर उत्तराखंड सरकार के खिलाफ बगावत का विगुल फूंकने वाले बागी कांग्रेस एमएलए भी बीजेपी के विधायकों और केंद्रीय नेताओं के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीजेपी नेताओं ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलकर उत्तराखंड के सियासी संकट के बारे में जानकारी दी।

इस बीच कांग्रेस ने भी शाम 7.30 बजे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात करने का निर्णय लिया। प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी, वरिष्ठ नेता मोती लाल बोरा, पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल, अहमद पटेल और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद जैसे नेताओं के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल राष्ट्रपति से मिलने पहुंचा।

इस बीच उत्तराखंड में विधानसभा का सत्र आहूत कर दिया गया है। खबर ये भी है कि बीजेपी हरीश रावत सरकार के शक्ति परीक्षण के लिए 28 मार्च तक का इंतजार करने के मूड में नहीं है। पार्टी 22 तारीख को ही शक्ति परीक्षण की मांग कर रही है। खबर ये भी है कि शक्ति परीक्षण से पहले ही कोई बड़ा धमाका भी हो सकता है। बीजेपी का एक वर्ग राज्य में तुरंत राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा वर्ग लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ना चाहता है।

खबर ये भी है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी मंगलवार को उत्तराखंड के राज्यपाल केके पॉल से राज्य के राजनीतिक हालात पर रिपोर्ट मांग सकते हैं।