उत्तराखंड में सियासी बवाल का कोई हल होता फिलहाल दिख नहीं रहा है। विजय बहुगुणा के बेटे साकेत सहित दो नेताओं को पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोमवार शाम अस्थायी राजधान देहरादून के बीजापुर गेस्ट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके विरोधियों पर जमकर हमला बोला।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बगावत करने वाले विजय बहुगुणा को बार-बार नए बीजेपी नेता कहकर उन पर कटाक्ष किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने यह प्रेस कॉन्फ्रेंस उन पर लगाए जा रहे तीन आरोपों का जवाब देने के लिए बुलाई है। मुख्यमंत्री पर ये तीन आरोप स्मार्ट सिटी, खनन में लूट और नैनीसार मामले में लगाए जाते रहे हैं।

सीएम हरीश रावत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू करने से पहले पत्रकारों के बीच एक चिट्ठी की फोटोकॉपी बंटवाई। यह चिट्ठी तत्कालीन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत, नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट और अन्य बीजेपी नेताओं ने उन्हें भेजी थी। साल 2014 के अंत में भेजी गई इस चिट्ठी में मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया है कि केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी ‘स्मार्ट सिटी’ परियोजना के लिए शिमला बाईपास या देहरादून के बाहर जगह चिन्हित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा, मुझ पर स्मार्ट सिटी के लिए टी-इस्टेट की जमीन चिन्हित कर कुछ खास लोगों को लाभ पहुंचाने और खुद का स्वार्थ साधने का आरोप लगाया गया है, जबकि सच्चाई यह है कि बीजेपी नेताओं ने मुझे चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने कहा, कि इस मामले में बीजेपी को बोलने का अधिकार ही नहीं है।

हरीश रावत की ‘स्मार्ट सिटी’ मामले में बीजेपी को घेरने की कोशिश पर प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता मुन्ना सिंह ने उनके दावों की हवा निकालने की कोशिश की है। मुन्ना सिंह ने कहा कि अगर ये मान भी लिया जाए कि बीजेपी नेताओं ने चिट्ठी लिखी तो भी हजारों करोड़ की जमीन को लेकर सालों से कोर्ट में चल रहे मामले को राज्य सरकार ने कमजोर तो किया ही, ताकि इसमें भारी लूट को अंजाम दिया जा सके।

मुख्यमंत्री ने खनन की लूट के आरोपों पर भी सफाई दी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का नाम लिए बिना उन्हें संबोधित करते हुए कहा कि खनन मामले में चुनौती देकर कहना चाहता हूं कि नए बीजेपी नेता के समय 500 से ज्यादा खनन के पट्टे दिए गए। असल बात तो यह है कि मुझे उनके काम की भी सफाई देनी पड़ रही है। हमने खनन के पट्टे बहुत कम ही दिए हैं।

नैनीसार में जिंदल को औने-पौने दाम पर जमीन देने के आरोपों पर हरीश रावत ने कहा कि यह कैबिनेट का फैसला है। हमने कैबिनेट में फैसला लिया है कि पहाड़ों में पूंजी आकर्षित करने के लिए कनसेशनल रेट पर ही नहीं प्रमोशनल आधार पर जमीन दी जाएगी। ताकि यहां रोजगार पैदा हो सकें और यहां के लोगों को उच्च दर्जे की शिक्षा मिल सके।