उत्तराखंड में चल रहे सियासी संकट के बीच रविवार शाम करीब साढ़े चार बजे मुख्यमंत्री हरीश रावत अस्थायी राजधानी देहरादून स्थित विधानसभा भवन पहुंचे। हरक रावत ने एक मीडिया चैनल से बात करते हुए बताया कि उनके कमरे पर हरीश रावत ने ताला लगवा दिया है। हरक ने बताया कि मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद उनके लोग फाइलों को निपटाने में जुटे थे, लेकिन हरीश रावत वहां आ धमके और कमरे पर ताला लगवा दिया। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री का बौखलाहट भरा कदम बताया।

इससे पहले बागी विधायक हरक सिंह रावत ने कहा था कि उत्तराखंड में जो भी हो रहा है वह मुख्यमंत्री बनने की लड़ाई नहीं है। उन्होंने कहा, सच तो यह है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत का घर दलालों का अड्डा बन गया था। हरक ने कहा कि हमने मुख्यमंत्री को कई बार आगाह भी किया लेकिन वे नहीं माने। उनका कहना है कि मैं कांग्रेसी था और रहूंगा, पार्टी छोड़कर कहीं नहीं जा रहा।

इस बीच मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि जनता की भावनाएं उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने पहले घोड़े की टांग तोड़ी और अब राज्य की टांग तोड़ना चाहती है। सीएम ने कहा, बागियों के पास अब भी समय है और वे वापस आ सकते हैं। खबर ये भी है कि विजय बहुगुणा से कांग्रेस नेता और उनकी बहन रीता बहुगुणा जोशी से लंबी बातचीत हुई।

बागी नेताओं ने रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के दिल्ली निवास पर बैठक की, जिसमें बीजेपा सांसद भगत सिंह कोश्यारी भी शामिल थे। इस बैठक में भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई और खबर है कि विधायक जल्द ही फिर से राजभवन का दरवाजा खटखटाएंगे। बागी विधायक राज्यपाल से मिलकर जल्द से जल्द कार्रवाई करने की मांग करेंगे।

बागियों के घर के बाहर नोटिस चस्पा
बता दें कि बागी विधायकों के घरों के बाहर विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से नोटिस चस्पा किए गए हैं। बागी विधायक नोटिस की भाषा पर सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं। हरक सिंह रावत का कहना है, मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि वित्त विधेयक पारित हो गया है। अगर ऐसा है तो फिर विधानसभा अध्यक्ष किस हक से नोटिस भेज रहे हैं। सदन से बाहर के आचरण पर विधानसभा अध्यक्ष कार्रवाई नहीं कर सकते।

इस बीच हरक सिंह रावत ने रविवार को पत्रकारों से कहा, ‘मेरा मुख्यमंत्री से कई मसलों पर मतभेद था। कई बार हरीश रावत ने खुद माना कि गलत हो रहा है, लेकिन उन्होंने चुप्पी साधे रखी। ऐसे में असंतुष्‍टों का गुस्‍सा भड़कना जायज था।’ कांग्रेस के बागी विधायक हरक सिंह रावत ने पूछा कि जब 36 विधायक खिलाफ हैं तो फिर भला सरकार कैसे बचेगी?

इधर, हरीश रावत को राज्यपाल कृष्णकांत पाल ने 28 मार्च तक विधानसभा में बहुमत साबित करने का मौका दिया है। सरकार के अल्पमत में आ जाने की दलील देते हुए उसे तुरंत बर्खास्त करने की बीजेपी की मांग को नजरअंदाज कर राज्यपाल ने रावत को राहत दे दी।

बहुमत साबित करने के लिए मिला वक्त
राज्यपाल ने शुक्रवार को विधानसभा में हुए पूरे घटनाक्रम को लेकर हरीश रावत को एक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने गतिरोध दूर कर 28 मार्च तक सदन में बहुमत साबित करने का वक्त दिया है। राज्यपाल के इस फैसले पर हरीश रावत ने कहा कि वह सदन में अपना बहुमत साबित करने को तैयार हैं।

राज्यपाल की ओर से समय मिलने के बाद मुख्यमंत्री हरीश ने भी आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने बागी तेवर दिखाने वाले मंत्री हरक सिंह रावत को कैबिनेट से बाहर कर दिया। उत्तराखंड के उद्यान एवं स्वास्थ्य शिक्षा मंत्री हरक सिंह नौ बागी विधायकों के गुट की अगुवाई कर रहे हैं। बागियों पर यह हरीश रावत की दूसरी कार्रवाई है। इससे पहले सरकार ने उत्तराखंड के महाधिवक्ता जनरल यू.के. उनियाल को बर्खास्त किया। कैबिनेट के निर्णय पर राज्यपाल ने अपनी मुहर लगा दी है।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार को शुक्रवार देर शाम राजनीतिक उथल-पुथल का सामना करना पड़ा। उसके नौ बागी विधायकों ने विपक्षी पार्टी बीजेपी से हाथ मिला लिया। उसे सदन में वित्त विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी 36 में से सिर्फ 32 ही मत मिले।