उत्तराखंड में सियासी घमासान अपने पूरे शबाब पर है। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने जिस तरह से अपनी ही पार्टी और पूर्व सहयोगी के खिलाफ झंडा बुलंद कर लिया है और हरीश रावत जिस तरह हेमवती नंदन बहुगुणा को याद कर रहे है, उसे देखते हुए साफ लगता है कि दोनों ही तरफ दिल तो जरूर टूटे हैं।

कुर्सी के इस गंभीर खेल के बीच उत्तरांचल टुडे आपके लिए लेकर आया है इस सियासी खेल के बीच याद आ रहे कुछ खास गाने, जो हरीश रावत, विजय बहुगुणा और अन्य बागी विधायकों की मौजूदा स्थिति को बयान करते हैं।

दर्द दिलों के कम हो जाते… मैं और तुम गर हम हो जाते
पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की बगावत के बाद सीएम हरीश रावत संभवतः यही गाना गुनागुना रहे हों। सच ही है अगर ये दोनों दिग्गज नेता मिलकर उत्तराखंड की बेहतरी के लिए काम करते तो राज्य विकास यात्रा में काफी आगे निकल जाता।

हम आपके हैं कौन?
पार्टी में खुली बगावत होने के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बागी विधायकों को वापस आने के लिए कई मिन्नतें कीं और कार्रवाई की धमकी भी दी। ऐसे में विजय बहुगुणा और हरक सिंह रावत सहित तमाम बागी विधायक शायद हरीश रावत से पूछ रहे थे ‘हम आपके हैं कौन?’

पल भर ठहर जाओ… अगर तुम साथ हो…
मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथी उनसे खुलेआम बगावत करके चले गए तो उनके दिल से बार-बार यही आवाज आयी होगी ‘पल भर ठहर जाओ…’

कुछ पल तो ठहर जाओ ना, या फिर लौट के आओ ना, यूं कहते नहीं अलविदा…
अपने ही साथियों ने जिस तरह से मुख्यमंत्री हरीश रावत का साथ छोड़ा है। यह तो तय है कि उनके दिल में यह गाना जरूर चल रहा होगा।

मुझे तेरी जरूरत है…
खुली बगावत के बाद हरीश रावत सरकार अल्पमत में आ गई है। ऐसे में उन्हें अपनी सरकार बचाने के लिए बागी विधायकों के लौट आने की सख्त जरूरत है। ऐसे में उनके दिल से लगातार यही आवाज आ रही है, ‘मुझे तेरी जरूरत है…’ वैसे बीजेपी भी सालों से यही गीत गुनगुना रही है।

बातों को तेरी हम भुला ना सके, होकर जुदा न हम जुदा हो सके…
वैसे तो मुख्यमंत्री हरीश रावत और विजय बहुगुणा के बीच ज्यादातर चिट्ठियों के माध्यम से ही बातें होती थीं, लेकिन अब दोनों ही चिट्ठियों की उन बातों को भुला नहीं पाएंगे।

कैसे दिन थे और कैसी थी वो रातें… जब करते थे हम सपनों से ही बातें…
सच में सरकार में बगावत के बाद से मुख्यमंत्री हरीश रावत की हंसी कहीं गुम हो गई है। अब तो वे अपने पुराने साथियों को याद करते हुए अकेले में यही गाना गुनगुना रहे होंगे।

कैसी ये जुदाई है, आंख भर मेरी आई है…
कांग्रेस के बागी विधायक लगातार सरकार के लिए मुसीबत बने हुए हैं और मुख्यमंत्री हरीश रावत की कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में उनके दिल-दिमाम में यही गाना चल रहा है।

कैसी तेरी खुदगर्जी, न धूप चुने न छांव… बन लिया अपना पैगम्बर, तर लिया तू सात समंदर…
मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए बागी विधायक लगातार यही गाना गुनगुना रहे हैं। बागी कांग्रेस नेताओं का कहना है कि हरीश रावत सिर्फ अपनी ही चलाते हैं। ऐसे में उनके लिए ये गाना बिल्कुल मुफीद है

तू भूला जिसे, तुझे वो याद करता रहा… तू जीता रहा, तेरे लिए वो मरता रहा…
शायद हरीश रावत अपने बागी साथियों के लिए यही गाना गुनगुना रहे हों। साथियों के बछुड़ने या छोड़कर जाने का दर्द है ही कुछ ऐसा।

मुझे छोड़ दो मेरे हाल पे, जिंदा हूं यार… काफी है…
मुख्यमंत्री हरीश रावत के बागी साथी बिल्कुल भी मानने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में अब उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा है। अब दो दिन बाद वे शायद यही गाना गुनगुनाने को मजबूर हो गए हैं… ‘मुझे छोड़ दो मेरे हाल पे, जिंदा हूं यार… काफी है’