उत्तराखंड के राज्यपाल केके पॉल ने मुख्यमंत्री हरीश रावत को खत लिखकर कहा है कि वे 28 मार्च से पहले अपना विधानसभा में बहुमत साबित करें। शनिवार देर शाम मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्यपाल से मुलाकात की और 18 मार्च के घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखा।

इससे पहले शनिवार दोपहर को हुई कैबिनेट बैठक से बाहर आते ही मुख्यमंत्री ने साफ़ कर दिया कि वो झुकने वाले नहीं हैं। कैबिनेट की बैठक के बाद एक के बाद एक कई ऐलान भी सामने आए।

एक निजी टीवी चैनल से बात करते हुए हरीश रावत ने साफ़ कहा कि वो इस्तीफ़ा नहीं देंगे, अगर सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाए तो राज्यपाल को इस्तीफ़ा सौंप देंगे। उनका दावा है कि उन्हें तमाम विधायकों का समर्थन हासिल है। उन्होंने मौजूदा घटनाक्रम को बीजेपी का कृत्य करार दिया और कहा कि यह उनकी सरकार को अस्थिर करने की साजिश है।

हरीश रावत ने कहा, पांच विधायक हमारे संपर्क में हैं। केंद्र की मोदी सरकार के बल के सामने हमारे छोटे से राज्य के विधायकों के लिए विरोध करना आसान नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘मैं इस्तीफ़ा नहीं दूंगा। बीजेपी सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाए तो मैं बहुमत सिद्ध करुंगा। बहुमत साबित नहीं कर पाया तो चुपचाप राज्यपाल के पास जाकर इस्तीफा दे दूंगा।’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘स्पीकर ने कुछ गलत नहीं किया। इतने सारे ग्रांट्स पास हो रहे थे, सभी पर वोटिंग करा लेते। तब क्यों नहीं कहा। मुझे तो पता भी नहीं चला था कि हंगामा इस बात पर हो रहा है।’

उन्होंने कहा, ‘बीजेपी नेता बैग लेकर घूम रहे हैं। नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री, यहां आए और खास तौर पर एयरपोर्ट खोला गया। विधायकों को प्लेन में भरकर ले गए। ये बर्ताव होना चाहिए क्या एक केन्द्रीय मंत्री का? आरएसएस के टॉप नेता देहरादून की सड़कों पर क्या कर रहे हैं? इनकम टैक्स की गाड़ियों में विधायकों के घर जा रहे हैं और पैसा ऑफर कर रहे हैं।’

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बागी नेताओं पर हमला बोलते हुए कहा, ‘जो लोग माफिया की सरकार बता रहे हैं वो कुछ दिन पहले तक मेरी तारीफ़ में कसीदे पढ़ते थे। बीजेपी उनसे यह सब बुलवा रही है।’

उत्तराखंड के सीएम ने कहा, ‘आलाकमान का विश्वास जिस दिन मुझ पर से हटेगा या आलाकमान इस्तीफा देने को कहेगा, उस दिन इस्तीफा देने में एक सेकेंड की भी देर नहीं करुंगा।’ विश्वासमत के सवाल पर हरीश रावत ने कहा, ‘इस पर फैसला स्पीकर का अधिकार है। मैं कुछ नहीं कह सकता।’