राजनीतिक जानकारों की मानें तो तकनीकी रूप से उत्तराखंड में मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार तो बच गई है। जानकारों के अनुसार संवैधानिक संकट अब भी बरकरार है। राज्यपाल केके पॉल इस मामले में तत्काल विशेष सत्र बुलाकर सरकार को बहुमत साबित करने के लिए कह सकते हैं।

कांग्रेस के नौ विधायक बगावत कर जिस तरह से बीजेपी के पक्ष में आ गए हैं, इससे सरकार बहुमत साबित नहीं कर पाएगी और गिर जाएगी। यदि कांग्रेस विधायक बीजेपी में शामिल होते हैं तो उनकी सदस्यता समाप्त हो जाएगी। कांग्रेस उन्हें पार्टी से निष्कासित करे तभी उनकी सदस्यता बच सकती है।

जो भी विधायक कांग्रेस के खिलाफ गए हैं, उनका निलंबन तय है। वरिष नेता विजय बहुगुणा तो राज्य के मुख्यमंत्री भी रहे हैं। गांधी परिवार से नजदीकी संबंध भी रखते हैं, उनका कांग्रेस के खिलाफ जाना हर किसी को आश्चर्य में डाल गया।

उत्तराखंड में संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश ने कहा, चाहे जो भी हो, सरकार पर कोई संकट नहीं है। राज्यपाल के सामने हम भी अपना पक्ष रखेंगे। जो लोग कांग्रेस के खिलाफ गए हैं, उन पर दल बदल कानून भी तो लागू होगा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा, अभी तक मामला विधानसभा का है। मुख्यमंत्री हरीश रावत और संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश से बात करने के बाद ही तय किया जाएगा कि अगला कदम क्या होगा। इतना जरूर है कि बीजेपी का असली चरित्र सामने आ गया है। बीजेपी का यह कदम लोकतंत्र पर कुठाराघात है।