उत्तराखंड में चार साल पुरानी कांग्रेस सरकार शुक्रवार रात संकट में घिर गई। उसके नौ विधायकों ने बगावत का झंडा बुलंद करते हुए सरकार गठन का दावा पेश करने वाली बीजेपी का समर्थन किया है। देर शाम कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इस बीच मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि हमारे सभी विधायक हमारे साथ हैं। देर शाम पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने हरीश रावत से इस्तीफे की मांग करके उनकी मुश्किल और बढ़ा दी।

पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद भगत सिंह कोश्यारी के नेतृत्व में बीजेपी का तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल के.के. पॉल से मिला और कहा कि हरीश रावत सरकार अल्पमत में आ गई है और इसे बर्खास्त किया जाए। प्रतिनिधिमंडल में उत्तराखंड मामलों के बीजेपी प्रभारी श्याम जाजू और महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल थे। इस बीच केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता महेश शर्मा भी देहरादून पहुंच गए।

राजभवन के सूत्रों के अनुसार, बीजेपी ने कांग्रेस के बागी विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश किया है। उत्तराखंड सरकार शुक्रवार को उस समय राजनीतिक संकट में फंस गई जब सत्ताधारी कांग्रेस के 36 में से नौ विधायकों ने मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ बगावत का बिगुल बजा दिया।

70 सदस्यीय राज्य विधानसभा में उस समय असमंजस की स्थिति पैदा हो गई जब पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और कृषि मंत्री हरक सिंह रावत सात अन्य कांग्रेस सदस्यों के साथ विपक्षी बीजेपी के साथ सुर में सुर मिलाते हुए बजट पारित कराने के लिए मत विभाजन की मांग करते हुए उनके साथ सदन में धरने पर बैठ गए।

हालांकि, अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने सदस्यों की मत विभाजन की मांग को अस्वीकार कर दिया और ध्वनिमत से बजट के पारित होने की घोषणा करते हुए सदन की कार्यवाही 28 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी।

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राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष अजय भट्ट व हरक सिंह रावत ने बाद में मीडिया से बातचीत में कहा कि वे लोग राजभवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात करेंगे और उन्हें हरीश रावत सरकार के अल्पमत में आने की जानकारी देंगे।

इससे पहले, विभागवार बजट मांगों के पारित हो जाने के बाद संसदीय कार्य मंत्री इंदिरा हृदयेश ने जैसे ही बजट विधेयक पारित कराने के लिए सदन से अनुमति मांगी, विपक्ष के नेता अजय भट्ट की अगुवाई में सभी बीजेपी नेता अपने स्थानों पर खड़े हो गए और अध्यक्ष कुंजवाल से उस पर मत विभाजन की मांग करने लगे।

कुंजवाल द्वारा उसे अस्वीकार करते ही पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, कृषि मंत्री हरक सिंह रावत, पूर्व उद्यान मंत्री अमृता रावत, विधायक शैलारानी रावत, प्रदीप बत्रा, कुंवर प्रणब सिंह चैंपियन, सुबोध उनियाल, डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल और उमेश शर्मा काउ बीजेपी विधायकों के समर्थन में खड़े हो गए और अध्यक्ष पर मत विभाजन की मांग स्वीकार करने की मांग करने लगे। इससे सदन में शोरगुल की स्थिति पैदा हो गई और मत विभाजन की मांग कर रहे सभी विधायक हरीश रावत सरकार विरोधी नारे लगाते हुए, अध्यक्ष के आसन के सामने धरने पर बैठ गए।

हालांकि, इसी बीच अध्यक्ष कुंजवाल ने बजट के ध्वनिमत से पारित होने की घोषणा की और सदन की कार्यवाही 28 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी। बीजेपी विधायकों तथा रावत सरकार के बाघी विधायकों ने सदन में हाथ लहराते हुए अपनी विजय का जश्न मनाया और कहा कि चूंकि उनके साथ 35 विधायकों का बहुमत है इसलिए हरीश रावत सरकार अल्पमत में आ गई है।

विधानसभा में शुक्रवार को बीजेपी के दो सदस्यों को छोडकर सभी 26 सदस्य मौजूद रहे। विधायक गणेश जोशी गिरफ्तार होने के कारण सदन मे मौजूद नहीं थे, जबकि उसके एक अन्य सदस्य भीमलाल आर्य पार्टी से असंतुष्ट होने के चलते नहीं आए।

उधर, कांग्रेस के भी एक सदस्य सरबत करीम अंसारी सदन में नहीं आ पाये जबकि रावत सरकार को समर्थन दे रहे प्रगतिशील लोकतांत्रिक मोर्चा के सभी छह सदस्य मौजूद थे। कुल 67 सदस्यों की प्रभावी क्षमता वाली विधानसभा में से 35 सदस्यों ने रावत सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। हरक सिंह रावत ने दावा किया कि बहुमत के लिए 34 सदस्यों की जरूरत है, जबकि हम मिलकर 35 सदस्य हो गए हैं।

उधर, अध्यक्ष कुंजवाल ने यह पूछे जाने पर कि सरकार के खिलाफ खुलकर आने वाले विधायकों की सदस्यता क्या समाप्त हो जाएगी, उन्होंने कहा कि इसके बारे में कोई भी निर्णय कांग्रेस पार्टी से लिखित में कुछ दिए जाने के बाद ही किया जाएगा।