अगर सब कुछ तय प्लान के मुताबिक चला तो 17-18 मार्च की रात उत्तराखंड की ऐतिहासिक तारीख में जुड़ जाएगी। हो सकता है कि उत्तराखंड के मुख्‍यमंत्री हरीश रावत सरकार का ये आखिरी बजट सत्र हो।

सतपाल महाराज के कांग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद से अटकलें लगाई जा रही थी कि उत्तराखंड में हरीश रावत की सरकार ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाएगी, लेकिन हरीश रावत ने कुछ असंतुष्‍ट विधायकों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर उन्‍हें शांत कर दिया था। इसमें सतपाल महाराज की पत्‍नी अमृता रावत भी शमिल थीं।

कांग्रेस में असंतुष्‍ट विधायकों की नाराजगी एक बार फिर बढ़ने लगी है। इसी का असर है कि 17 मार्च देर शाम होते-होते अचानक उत्तराखंड का सियासी पारा आसमान छूने लगा। बीजेपी के कई दिग्गज नेता देहरादून पहुंच गए। बीजेपी के सभी विधायकों को एक बैठक के बाद रात को घर नहीं जाने दिया गया।

इतना ही नहीं पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व अन्य कई नेताओं को भी होटल में ठहरने के निर्देश जारी किया गया। सभी के लिए होटल में विशेष रूम बुक कराए गए थे। माना जा रहा है बीजेपी कोई बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। इस खेल में सत्ताधारी कांग्रेस के कुछ असंतुष्ट विधायक भी शामिल हैं, जो इस खेल का हिस्सा हैं।

घर के भेदी भी कम नहीं हरीश रावत कैबिनेट में
नाम तो कईयों के गिनवाए जा रहे हैं, लेकिन असल बात क्या है इसका पता शुक्रवार दोपहर तक ही लग पाएगा। सुनने में आया है कि जब सरकार सदन में बजट को पास कराने का प्रयास करेगी उस दौरान कांग्रेस के ही कुछ विधायक पार्टी के खिलाफ जा सकते हैं।

छह विधायक खुलकर हरीश रावत सरकार से नाराजगी जाहिर करते रहे हैं। इन सभी को बहुगुणा खेमे में माना जाता है। सबकी अपनी-अपनी मांगें हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और अब विधायक विजय बहुगुणा जुलाई में खाली हो रही राज्यसभा सीट चाहते हैं।

हरीश रावत के धुर विरोधी हरक सिंह रावत अपने चहेतों के लिए कम से कम तीन विधानसभा सीटों की मांग कर रहे हैं। जिनमें वे खुद के लिए डोईवाला सीट पर सीएम हरीश रात से पक्का आश्वासन चाहते हैं। इसके अलावा रावत कैबिनेट में विजय बहुगुणा, सुबोध उनियाल सहित कम से कम तीन लोगों को मंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं।

कांग्रेस के असंतुष्टों पर बीजेपी की नजर
फिलहाल हरीश रावत के लिए इन मांगों को पूरा कराना संभव नहीं जान पड़ता। बीजेपी की निगाह कम से कम दस असंतुष्ट विधायकों पर है। हरीश रावत सरकार को समर्थन देने वाले पीडीएफ के विधायकों पर भी काफी कुछ दारोमदार है। पीडीएफ के तीन विधायक हैं। तीनों ही हरीश रावत सरकार में मंत्री हैं। कांग्रेस में कई बार इनसे मंत्री पद वापस लेने की बात सामने आई, लेकिन हरीश रावत ने इनका बचाव किया।

अब देखना होगा कि रावत सरकार पर संकट की घड़ी में इनका क्या रोल रहता है। पीडीएफ पर भी बीजेपी की नजरें हैं। रावत सरकार में शिक्षा मंत्री, मंत्री प्रसाद नैथानी, सतपाल महाराज के करीबी माने जाते हैं।

कैलाश विजयवर्गीय देहरादून में
गुरुवार रात से ही बीजेपी अलाकमान के खास माने जाने वाले कैलाश विजयवर्गीय अस्थायी राजधानी देहरादून में हैं। देर रात दून के एक होटल में बीजेपी नेताओं की बैठक भी बुलाई गई। इस बैठक में बीजेपी के प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू, राष्ट्रीय महामंत्री संगठन शिवप्रकाश सहित बीजेपी के सभी विधायक व पदाधिकारी भी मौजूद थे।

बैठक को एकदम गोपनीय रखा गया। यहां तक कि सभी विधायकों के फोन तक बंद करवा दिए गए। मीडिया को भी देर रात इसकी भनक लगी। कुल मिलाकर शुक्रवार का दिन उत्तराखंड की राजनीति के लिहाज से काफी अहम होने जा रहा है।
बीजेपी राज्य की हरीश रावत सरकार को गिराने की पूरी तैयारी है। हरीश रावत सरकार का भविष्य और सरकार को गिराने की बीजेपी की उम्मीदें अब असंतुष्ट विधायकों पर आकर टिक गई हैं।