उत्तराखंड सरकार पर मंडरा रहे खतरे पर चुप्पी तोड़ते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा है कि सरकार को कुछ होने नहीं जा रहा है, क्योंकि जनता का आशीर्वाद और विश्वा‍स हमारे साथ है।

इस मामले में बीजेपी नेता तीरथ रावत ने कहा है कि जहां तक उत्तहराखंड में सरकार गिराने की बात है तो कांग्रेस के असंतुष्‍ट विधायक दो-तीन बार पहले भी आए थे, अगर बीजेपी चाहती तो तब सरकार गिरा दी होती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के 12-13 असंतुष्ट विधायक हमारे संपर्क में हैं।

उत्तराखंड में हरीश रावत की अगुवाई में चल रही कांग्रेस सरकार को गिराने के लिए बीजेपी की ‘साजिश’ जारी है। इसी को लेकर बीजेपी नेताओं ने गुरुवार रात बैठक की है, जिसमें उत्तराखंड के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय, प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू, राष्ट्रीय महामंत्री संगठन शिवप्रकाश सहित बीजेपी के सभी विधायक और बड़े नेता शामिल थे।

इस बैठक को इतना गोपनीय रखा गया था कि शामिल सभी विधायकों के फोन तक बंद करवा दिए गए थे और सभी को होटल में बंद कर दिया गया था। इस मामले ने सुबह होते ही देहरादून का सियासी पारा चढ़ा दिया। मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित कांग्रेस के तमाम नेताओं ने कहा कि सरकार नहीं गिरने वाली है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बीजेपी की साजिश सफन नहीं होगी।

70 सीटों वाली उत्तराखंड विधानसभा में कांग्रेस के 36, बीजेपी के 28, निर्दलीय 3, बीएसपी के 2 और यूकेडी का 1 विधायक है। छह विधायक खुलकर हरीश रावत सरकार से नाराजगी जाहिर करते रहे हैं। इन सभी को बहुगुणा खेमे में माना जाता है। सबकी अपनी-अपनी मांगें हैं। बीजेपी का कहना है कि 12-13 कांग्रेस विधायक उनके संपर्क में हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री और अब विधायक विजय बहुगुणा जुलाई में खाली हो रही राज्यसभा सीट चाहते हैं। हरीश रावत के धुर विरोधी हरक सिंह रावत अपने चहेतों के लिए कम से कम तीन विधानसभा सीटों की मांग कर रहे हैं। जिनमें खुद के लिए डोईवाला सीट पर सीएम हरीश रात से पक्का आश्वासन चाहते हैं। इसके अलावा रावत कैबिनेट में विजय बहुगुणा, सुबोध उनियाल सहित कम से कम तीन लोगों को मंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल सीएम हरीश रावत के लिए इन मांगों को पूरा कराना संभव नहीं जान पड़ता।

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हरीश रावत सरकार को समर्थन देने वाले पीडीएफ के विधायकों पर भी काफी कुछ दारोमदार है। पीडीएफ के तीन विधायक हैं। तीनों ही हरीश रावत सरकार में मंत्री हैं। कांग्रेस में कई बार इनसे मंत्री पद वापस लेने की बात आई लेकिन हरीश रावत ने इनका बचाव किया। अब देखना होगा कि रावत सरकार पर संकट की घड़ी में इनका क्या रोल रहता है। पीडीएफ पर भी बीजेपी की नजरें हैं। रावत सरकार में शिक्षा मंत्री, मंत्री प्रसाद नैथानी सतपाल महाराज के करीबी माने जाते हैं।

उत्तराखंड विधानसभा का पेचीदा नंबर गेम
कांग्रेस की मानें तो उसे कुल 42 विधायकों का समर्थन हासिल है, लेकिन बहुगुणा गुट के छह विधायक खुलकर हरीश रावत के विरोध में हैं तो बीजेपी सूत्रों का दावा है कि कम से कम कांग्रेस के दस असंतुष्ट विधायक उनके संपर्क में हैं। उधर, पीडीएफ में भी, कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में गए सतपाल महाराज के समर्थक कुछ विधायक, बीजेपी के संपर्क में बताए जा रहे हैं।

बीजेपी नेताओं की राज्यपाल से मुलाकात
उधर, अपने विधायक की गिरफ्तारी पर नाराज बीजेपी के विधायक राज्यपाल से मिलने के लिए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि उत्तराखंड सरकार राजनीतिक फायदे के लिए ऐसा कर रही है। उनके विधायक को बिना उचित कारण के गिरफ्तार किया गया है।

बीजेपी के सूत्र यह भी बता रहे हैं कि यदि विधानसभा में कांग्रेस की सरकार बजट सत्र के दौरान गिरती है तो बीजेपी सरकार बनाने का दावा कर सकती है। राज्यपाल को मिलकर बीजेपी नेता सदन में स्पीकर के रोल को लेकर भी बात करेंगे कि स्पीकर निष्पक्ष होकर सदन की कार्यवाही को अंजाम दें।

इस बाबत बीजेपी नेता स्पीकर को एक पत्र भी दे सकते हैं। गौरतलब है कि राज्य में अचानक बदले सियासी महौल के मद्देनजर राज्यपाल भी शुक्रवार सुबह दिल्ली से देहरादून पहुंच रहे हैं।