उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने घोड़े को कथित रूप से पीटकर घायल करने के आरोपी बीजेपी विधायक गणेश जोशी के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लेने से आज इंकार करते हुए कहा कि राज्य सरकार पुलिस के काम में हस्तक्षेप नहीं करेगी।

विधानसभा में बुधवार को भी गत 14 मार्च को बीजेपी के विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम के दौरान घायल हुए घोड़े शक्तिमान का मुद्दा छाया रहा। शून्य काल के दौरान बीजेपी सदस्यों द्वारा उठाए गए इस मुद्दे का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि घोड़े की टांग टूटने से पुलिस को एक अंगरक्षक का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि इस घोड़े ने पुलिस में काफी सेवा की थी और पुलिस भी उसे अपने एक साथी के रूप में देखती थी।

रावत ने कहा कि वह मानते हैं कि सरकार को पुलिस के काम में दखल नहीं देना चाहिए और जहां तक विपक्षी सदस्यों के उन आरोपों का सवाल है कि उन पर पुलिस ने अपने घोड़े चढ़ाए तो वह कहेंगे कि पुलिस ने अपना काम अच्छे तरीके से किया और कहीं अपना संयम नहीं खोया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रैली एक राजनीतिक कार्यक्रम है, जिसे सभी पार्टियां बढ़-चढ़कर करती हैं। उन्होंने कहा कि घोड़े की टांग टूटना सभी के लिए चिंता का विषय है और बीजेपी के भी एक नेता ने वाशिंगटन से उन्हें फोन कर इस घटना पर चिंता जताई है। उन्होंने इस बात को भी खारिज कर दिया कि इस मामले में मीडिया ने एकतरफा रिपोर्टिंग की और कहा कि यह विषय सदन का नहीं है।

इससे पहले, बीजेपी सदस्य मदन कौशिक, बंशीधर भगत और आरोपों से घिरे विधायक जोशी ने इस मामले में जोर देकर कहा कि विधायक के खिलाफ मुकदमा वापस होना चाहिए। जोशी ने कहा कि उन्हें गलत मामले में फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने घोड़े को पीछे करने के लिए उसके आगे सिर्फ लाठी फटकारी थी।