सांकेतिक तस्वीर

उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून में बंधुआ मजदूरी उन्मूलन की दिशा में काम कर रहे आराधना ग्रामीण विकास केंद्र समिति ने हिमाचल के ननार गांव से एक बंधुआ मजदूर परिवार को मुक्त कराया। बंधुआ मजदूर की शिकायत पर पुलिस ने बंधुआ मजदूरी कराने वाले बागान स्वामी के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की है।

पुलिस के मुताबिक समिति के संरक्षक दौलत कुंवर को सूचना मिली की नेपाली मूल के एक परिवार से हिमाचल के ननार गांव तहसील चौपाल जिला शिमला स्थित एक बागान में जबरन मजदूरी कराई जा रही है। सूचना पर वे गुपचुप तरीके से बागान पहुंचे और बंधुवा मजदूर परिवार को सकुशल लेकर डाकपत्थर चौकी पहुंचे।

यहां परिवार के मुखिया नर बहादुर की शिकायत पर पुलिस ने बागान स्वामी प्रताप किमटा निवासी ननार गांव तहसील चौपाल हिमाचल प्रदेश के खिलाफ बंधुवा मजदूरी अधिनियम के तहत जीरो एफआईआर दर्ज की। पीड़ित नर बहादुर ने बताया कि 20 साल पहले उसे और उसकी पत्नी शर्मिला को प्रताप किमटा मजदूरी के बहाने बाड़वाला कोतवाली विकासनगर से चौपाल शिमला ले गया, जहां उनसे जबरन मजदूरी कराई गई।

उन्हें मजदूरी भी नहीं दी गई। सिर्फ जीनेभर के लिए खाना और पहनने के लिए कपड़े दिए जाते थे। वहीं उनके तीन बच्चे चैमसी (18), भागमल (13), पूरणमल (09) पैदा हुए। आरोप लगाया कि उनके बच्चों से भी जबरन मजदूरी कराई जाती थी। मजदूरी मांगने पर उन्हें मारा-पीटा और जान से मारने की धमकी दी जाती थी।

समिति के संरक्षक दौलत कुंवर ने बताया कि नर बहादुर की बड़ी बेटी का विवाह बाड़वाला निवासी मनजीत के साथ हुआ है। जब कभी मनजीत अपने सास-ससुर से मिलने जाता था तो उसे मिलने नहीं दिया जाता था। इसकी शिकायत मनजीत ने समिति से की थी। जिस आधार पर समिति ने बंधुआ बनाए गए परिवार को सुरक्षित वहां से निकाला।

एसएसआई अरविंद चौधरी ने बताया कि मामले में जीरो एफआईआर दर्ज की गई है, जिसे जांच के लिए शिमला भेजा जा रहा है।