भारत का मुकुट कहे जाने वाले हिमालय का बदलता मौसम विकास के लिए चिंता बना हुआ है। इसी चिंता के बीच नैनीताल के कुमाऊं विश्वविद्यालय में मंथन शुरू हो गया है। सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन पदम भूषण चण्डी प्रसाद भट्ट और कुमाऊं विश्वविध्यालय के कुलपति एचएस धामी ने किया है।

हिमालय क्षेत्र में सतत विकास संभावनाएं एव चुनौतियां नाम से आयोजित इस सेमिनार में देशभर के मौसम वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। दो दिन तक चलने वाले इस सेमिनार में मंगलवार को वक्ताओं ने हिमालय के बदलते स्वरूप पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हिमालय को केन्द्र में रखते हुए देश की संसद को विकास की नीतियां तैयार करने की जरूरत है, न कि पर्यटन स्थल के रूप में बनाए जाने के बाद इसका विदोहन किया जाए।

वहीं चण्डी प्रसाद भटट् का मानना है कि विकास जरूर होना चाहिए, लेकिन नीति निर्धारकों को ये सोचना पड़ेगा कि कैसा विकास हिमालय क्षेत्र में हो। वहीं राज्य में कभी बारिश और कभी ओला वृष्टी से बदलते मौसम चक्र पर पर्यावरणविदों ने चिन्ता जाहिर की है।

नैनीताल में एक कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे पर्यावरण चण्डी प्रसाद भट्ट ने कहा है कि हिमालय क्षेत्र में पर्यावरण को खासा नुकसान हुआ है, जिसके चलते हिमालय का बदलता मौसम विकास के लिए चिंता बना हुआ है। इन्ही चिंता के बीच नैनीताल के कुमाऊं विश्वविद्यालय में मंथन शुरू हो गया है।

पद्म भूषण चण्डी प्रसाद भट्ट का कहना है कि बदलाव का असर पिछले 7 महिनों से पड़े सूखे से दिखाई दिया और एक दम ओलों की बरसात हुई है। साथ ही ये भी आगाह किया है कि अगर इस वक्त देश के निति निर्धारक जागे नही तो आने वाले दिनों में खतरा और बढ़ सकता है। बारिश और बर्फबारी में कमी आई है।