केंद्रीय सहायता को लेकर उत्तराखंड सरकार और विपक्षी बीजेपी के बीच जुबानी जंग अब निर्णायक स्थिति में पहुंचने वाली है। हरीश रावत सरकार ने मौजूदा बजट सत्र में केंद्र से मिलने वाली रकम पर व्हाइट पेपर जारी करने की तैयारी कर ली है, जिसके बाद विपक्ष थोड़ा डिफेंसिव मूड में दिख रहा है।

डिफेंसिव मूड के बावजूद विपक्ष की दलील बरकरार है कि केंद्र की ओर से पूरी मदद की जा रही है। वहीं, मुख्यमंत्री का कहना है कि हम इसी सत्र में सारा चिट्ठा सदन में रखकर बीजेपी के दिल की मुराद पूरी करे देंगे।

कहने की जरूरत नहीं है कि केंद्रीय सहायता के तौर पर मिलने वाली धनराशि उत्तराखंड में हमेशा सियासी मुद्दा रही है। सत्ताधारी कांग्रेस और हरीश रावत सरकार लगातार कह रही है कि केंद्र ने उत्तराखंड की ग्रांट को ब्लॉक कर सहायता में कटौती कर दी है।

बीजेपी का कहना है कि मोदी सरकार दिल खोलकर राज्य को पैसा दे रही है। इसी कारण अब हरीश रावत सरकार बीजेपी के दावों की हवा निकालने के लिए बकायदा व्हाइट पेपर लाने की तैयारी में है।

वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश कहना है कि मौजूदा फंडिंग पैटर्न के कारण राज्य को 1676 करोड़ का नुकसान हुआ है। बता दें कि योजना आयोग के खात्मे और नीति आयोग के गठन के बाद राज्यों के फंडिंग पैटर्न में बदलाव हुआ है। वित्त मंत्री के मुताबिक केंद्रीय करों में राज्यों का अंश 32 से बढ़कर 42 तो हो गया है, लेकिन दूसरा पहलू यह भी है कि ब्लॉक ग्रांटस खत्म होने से उत्तराखंड को 1500 करोड़ रुपये की चपत लगी है।

कांग्रेस सरकार की दलील है कि यह आंकड़े हमारे नहीं बल्कि केंद्र सरकार के हैं। विधानसभा के सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष में तनातनी के बीच कांग्रेस विधायक नवप्रभात ने तड़का लगाते हुए कहा कि इस पर श्वेत पेपर जारी किया जाए।

मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि इसी सत्र में व्हाइट पेपर जारी करेंगे, जिसके बाद डिफेंसिव हुई बीजेपी के सल्ट विधानसभा क्षेत्र से विधायक सुरेंद्र सिंह जीना का कहना है कि सरकार श्वेत पत्र की बात कहकर सदन में इस पर चर्चा करने से कतरा रही है।