उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार को 4 साल से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है। इस दौरान कांग्रेस ने राज्य को पहले विजय बहुगुणा और अब हरीश रावत के रूप में दो मुख्यमंत्री भी दिए हैं। पिछले पांच सालों से राज्य की कांग्रेस सरकार युवाओं को रोजगार देने की बड़ी-बड़ी बातें कर रही है, लेकिन राज्य के युवा रोजगार के लिए अब भी बड़ी मात्रा में पलायन को मजबूर हैं।

इस बीच सरकार के बड़े-बड़े वादों और बातों की पोल वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश द्वारा शुक्रवार को पेश किए गए बजट की पुस्तिका ने ही खोल दी है। असल में बजट पुस्तिका सरकार को आईना दिखा रही है। बजट दस्तावेज में स्पष्ट है कि 136 विभागों, आयोगों व निकायों में कुल 84 हजार पद अब भी खाली पड़े हैं।

ये पद स्थाई व अस्थाई दोनों ही प्रकृति के हैं। दो साल पहले रिक्त पदों की यह संख्या 72 हजार थी, यह आंकड़ा भी दो साल पहले सदन के भीतर रखा गया था। सदन में पेश किए गए बजटीय दस्तावेज के अनुसार शिक्षा विभाग में सबसे ज्यादा रिक्त पद पड़े हैं। माध्यमिक शिक्षा (नवसृजित) अकेले विभाग में 14929 पद रिक्त पड़े हैं।

इसके अलावा विद्यालयी शिक्षा में 12617 पद खाली हैं। प्राविधिक शिक्षा विभाग में 2013 और चिकित्सा लोक स्वास्थ्य विभाग में 3403 पद रिक्त हैं। सरकार ने महिलाओं के लिए खूब बजट दिया, लेकिन महिला सशक्तिकरण विभाग में 7992 पद अब भी खाली पड़े हैं।

यहां भी खुली सरकार की पोल
उद्योगों को बढ़ावा देने का दावा करने वाली सरकार खुद कर्मचारी बीमा योजना व श्रम चिकित्सा सेवाएं विभाग में 1784 पदों पर भर्तियां नहीं कर बायी। जिला स्तर तक ग्राम्य विकास में 558 पद और औद्योगिक न्यायाधिकरण व श्रम न्यायालय में 614 पद खाली हैं। आरईएस जैसे छोटे विभाग में भी 1340 पद खाली हैं।

ऐसे पहुंचेगी गांव-गांव सड़क?
सरकार हर गांव को सड़क से जोड़ने की बात तो करती है, लेकिन गांव को सड़क से जोड़ने वाले विभाग पीडब्लूडी में ही 2366 पद खाली हैं। इसके अलावा वानिकी व वन्य जीव के मामले में राज्य के बेहद महत्वपूर्ण व संवेदनशील माना जाता है, और इस विभाग में 2273 पद खाली हैं।

अधिकारियों का भी टोटा
राज्य में विभिन्न विभागों में आयोजनेत्तर श्रेणी के राजपत्रित अफसरों के कुल 4890 पद खाली हैं। इनमें श्रेणी ‘क’ के1230 और श्रेणी ‘ख’ के 3660 पद रिक्त पड़े हैं। योजनागत श्रेणी में रखे जाने वाले भी राजपत्रित व अराजपत्रित अफसरों के 3559 पद खाली हैं।

यह है असली वजह
यदि वित्त विशेषज्ञों की मानें और अगर रिक्त पड़े सभी पदों पर भर्तियां कर दी जाए, राज्य के वित्तीय हालत बिगड़ जाएगी। क्योंकि राज्य के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि मौजूदा कर्मियों के साथ नई भर्ती कर दी जाए। अगर ऐसा हुआ तो वेतन नहीं मिलेगा और राज्य में वित्तीय संकट जैसा आपातकाल पैदा हो जाएगा।