देहरादून।… मुख्यमंत्री हरीश रावत की कथित मंजूरी के बगैर उच्च पदों पर राजनीतिक नियुक्तियां किए जाने को लेकर उत्तराखंड विधानसभा में विपक्षी बीजेपी ने गुरुवार को वॉकआउट किया।

बीजेपी ने कहा है कि यह एक गंभीर मुद्दा है, जिस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता अजय भट्ट ने 25 फरवरी 2016 को मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह द्वारा विभिन्न विभागों को लिखे गए पत्रों को पढ़कर सुनाया, जिसमें यह स्वीकार किया गया है कि आयोगों, निगमों और परिषदों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष जैसे कई पदों पर नियुक्ति मुख्यमंत्री की मंजूरी के बगैर की गई है।

भट्ट ने इसे एक बहुत गंभीर विषय करार देते हुए इस मुद्दे पर सदन में चर्चा कराने की मांग की और कहा कि इस पर गहन चर्चा की जरूरत है, क्योंकि मुख्यमंत्री के प्राधिकार पर सवाल उठा है।

उन्होंने बजट सत्र के दूसरे दिन कहा कि इससे जाहिर होता है कि राज्य में एक नहीं बल्कि कई मुख्यमंत्री हैं। मंत्री और अधिकारी मुख्यमंत्री के प्राधिकार को धता बता रहे हैं। यह राज्य में संवैधानिक संकट का एक संकेत है।

इस बारे में एक तकनीकी विवाद है कि विषय पर किस नियम के तहत चर्चा होनी चाहिए। जब संसदीय कार्य मंत्री इंदिरा हृदयेश ने कहा कि संबद्ध विभागों ने मुख्य सचिव को अपने जवाब भेजे हैं, तब भट्ट ने कहा कि यह चीजों को ढकने के लिए एक चतुराई भरा जवाब है।

भट्ट सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करने की घोषणा करते हुए अपनी सीट से उठ गए और शेष विपक्षी सदस्यों ने भी उनका अनुकरण किया।