मुख्यमंत्री जी इधर ध्यान दें! पिथौरागढ़ स्पोर्ट्स हॉस्टल के छात्रों को दो वक्त खाना देंगे तो मेडल लाएंगे

एक तरफ उत्तराखंड 2018 में होने जा रहे राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के लिए जुटा है। दूसरी ओर पिथौरागढ़ स्पोर्ट्स हॉस्टल के छात्रों को दो वक्त की रोटी भी ढंग से नहीं मिल पा रही है।

इस स्पोर्ट्स हॉस्टल में बदइंतजामी का आलम ये है कि छात्र खेलों का अभ्यास करने के बजाय रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पिथौरागढ़ स्पोर्ट्स हॉस्टल के जिन छात्रों को अपना पूरा ध्यान खेल पर लगाना चाहिए, वे इन दिनों दो वक्त की रोटी के लिए सड़कों पर हैं। इन छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल में उन्हें लम्बे समय से बेहद ही घटिया दर्जे का खाना दिया जा रहा है।

नियमों के मुताबिक, स्पोर्ट्स हॉस्टल के छात्रों को वेज और नॉनवेज की भरपूर डाइट दी जानी जरूरी है, लेकिन यहां के छात्रों के साथ अर्से से खाने के नाम पर रस्मअदायगी की जा रही है। छात्र तारा पाण्डे का कहना है कि वे घटिया खाने को लेकर कई दफा शिकायत कर चुके हैं, लेकिन विभाग कोई ध्यान नहीं देता।

छात्रों पर मंडराए भोजन संकट ने उनके बेहतर खिलाड़ी बनने की उम्मीदों पर सवाल खड़े किए ही हैं। साथ ही इनका स्वास्थ्य भी खराब रहने लगा है। वहीं विभाग का कहना है कि नियमों के मुताबिक ही छात्रों को खाना दिया जा रहा है। जिला खेल अधिकारी विनोद वल्दिया का कहना है कि हॉस्टल में नियमों के मुताबिक ही खाना दिया जा रहा है, लेकिन टेंडर कम कीमतों पर पड़ने के कारण कुछ समस्याएं आ रही हैं।

खेल और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से कतई मेल नही खाती। ऐसे में ये सवाल उठना भी लाजमी है कि जब भावी खिलाड़ियों को विभाग दो वक्त का अच्छा खाना भी नहीं खिला पा रहा है तो, ऐसे स्पोर्ट्स हॉस्टल का औचित्य ही क्या है?