जिस घर-आंगन को आप बरसों पहले छोड़ आए थे, जिस गांव से नाता तोड़ आए थे, अब राज्य की हरीश रावत सरकार उन गांवों और घर-आंगन की जिम्मेदारी अपने सिर ले रही है।

कुमाऊं में गर्ब्याग से कुटी तक के छह गांवों के खाली पड़े घरों की जिम्मेदारी अब सरकार लेगी। दरअसल संस्कृति विभाग की ओर से 75 साल पुराने भवनों को संरक्षित किए जाने के लिए दोबारा सर्वे किया जा रहा है।

इस बार इस सर्वे में ऐसे भवन भी शामिल कर लिए जाएंगे, जहां कोई नहीं रहता। सरकार अपने संरक्षण में लेकर ऐसे भवनों को संरक्षित कराएगी। इसके साथ ही जौनसार के रवाईं क्षेत्र के दो सौ साल पुराने घरों को जस का तस उठाकर दूसरी जगहों पर रखा जाएगा, जहां पर्यटक ऐसे घरों को देख सकें।

संस्कृति विभाग की ओर से कुछ समय पहले इन 6 गांवों के सर्वे कराए गए। जिन घरों में लोग मिले या जिनके मालिकों का पता लग गया। उन घरों का चिन्हीकरण कर लिया गया। इसके साथ ही ऐसे घर छोड़ दिए गए, जहां कोई नहीं मिला। सरकार की ओर से ऐसे 75 साल पुरानी शैली में बने घरों को संरक्षित कर मालिकों को 50 हजार रुपये दिए जाने की योजना है।

ये घर जैसे बने हैं, उन्हें उसी स्वरूप में संरक्षित किया जाएगा, ताकि यहां की परंपरा को बचाया जा सके। इसके साथ ही रवाईं क्षेत्र के दो सौ घरों को भी संरक्षित किया जा रहा है। उन्हें जस का तस उठाकर ऐसी जगहों पर रखे जाने की योजना बन रही है, जहां पर्यटक इन दो सौ साल पुराने घरों को देख सकें।

6 गांवों के इतने घरों का हुआ चिन्हीकरण
गर्ब्याग – 7
नपच्यो – 5
गुंजी – 12
नाबी – 6
रौंगकांग – 7
कुटी – 10