उत्तराखंड के 300 जूनियर हाईस्कूलों पर बंदी की तलवार लटक गई है। सरकार के नए नियम के मुताबिक राज्य में 10 से कम छात्र संख्या वाले जूनियर हाईस्कूलों को बंद कर दिया जाएगा। इन स्कूलों के भवनों में हाईस्कूल संचालित किए जाएंगे। इन स्कूलों के शिक्षकों और विद्यार्थियों को अन्य विद्यालयों में समायोजित किया जाएगा।

इस संबंध में सरकार की ओर से शिक्षा निदेशालय से प्रस्ताव मांगा गया है। यदि ऐसा हुआ तो उत्तराखंड के करीब 300 जूनियर हाईस्कूल बंद हो सकते हैं। स्कूल बंद होने से 1000 से ज्यादा टीचर प्रभावित होंगे। यही वजह है कि सरकार के इस फैसले की भनक लगते ही शिक्षक आंदोलन पर उतर आए हैं और उन्होंने पिछले कुछ दिनों से सरकार की नाक में दम किया हुआ है। 23 फरवरी को इस मामले में टीचरों ने शिक्षा मंत्री से भी मुलाकात की, लेकिन बात नहीं बनी।

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत उत्तराखंड में 750 से ज्यादा जूनियर हाईस्कूलों को हाईस्कूल के रूप में उच्चीकृत किया गया है। उच्चीकृत हुए इन स्कूलों में जूनियर हाईस्कूल और हाईस्कूल दोनों संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब दस से कम छात्र संख्या वाले जूनियर हाईस्कूलों में हाईस्कूल ही संचालित किये जाएंगे। जबकि इससे अधिक छात्रों वाले जूनियर हाईस्कूलों में चल रहे हाईस्कूलों को अलग कर दिया जाएगा।

जूनियर हाईस्कूलों के भवन में चल रहे हाईस्कूलों को अपने भवन की व्यवस्था नहीं होने तक किराए के भवन या किसी अन्य भवन में संचालित किया जाएगा। सरकार ने निर्णय लिया है कि दस से कम छात्र संख्या वाले ऐसे जूनियर हाईस्कूल माध्यमिक शिक्षा विभाग को हस्तांतरित कर दिए जाएं। इनका प्राथमिक शिक्षा विभाग की ओर से संचालन नहीं किया जाएगा।