तमाम विपक्षी नेता और स्वयं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत भी भले ही केंद्रीय आम बजट को लेकर निराशा जता रहे हैं, लेकिन उत्तराखंड के किसान और पहाड़ी इलाके के लोग खुश नजर आ रहे हैं। आम बजट 2016-17 में कृषि क्षेत्र को विशेष तवज्जो देने से देवभूमि के किसानों को उम्मीद है कि आने वाले समय में न सिर्फ पहाड़ों में खेती लहलहाएगी और उनकी माली हालत सुधरेगी, बल्कि राज्य के जैविक उत्पादों का पूरी दुनिया में डंका बजेगा।

आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य में 10.67 लाख किसान 843000 हेक्टेयर में खेतीबाड़ी करते हैं। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान 10.56 प्रतिशत है। राज्य की 58 फीसदी जनसंख्या खेतीबाड़ी पर निर्भर है। खेतीबाड़ी को बढ़ावा देने को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से दर्जन भर योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

तमाम प्रयासों के बावजूद किसानों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। आम बजट में जैविक खेती को बढ़ावा देने, आपदाग्रस्त गांवों को अंत्योदय योजना के तहत विशेष बजट देने, मनरेगा का बजट बढ़ाकर 38500 करोड़ करने संबंधी प्रस्तावों से राज्य में खेतीबाड़ी को मदद मिलेगी।

अब होगी सिंचाई की बेहतर व्यवस्था
बजट में सिंचाई योजनाओं के लिए 20000 करोड़ का विशेष पैकेज दिए जाने से भी किसानों को उम्मीद जगी है। नाबार्ड के आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य में 843000 हेक्टेयर में से महज 3.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई नहरों, सरकारी ट्यूबवेल, पंप सेट से हो पाती है।

प्रतिशत के लिहाज से महज 30.93 प्रतिशत खेतों की सिंचाई हो पाती है, जबकि बाकी खेतीबाड़ी बारिश पर निर्भर है। बजट की कमी के चलते केंद्र एवं राज्य सरकार की तमाम छोटी बड़ी सिंचाई परियोजनाएं या तो शुरू ही नहीं हो पाईं और यदि शुरुआत हुई तो आधी-अधूरी ही हैं।

अब चौपट नहीं होगी मेहनत
अब जबकि आम बजट में सिंचाई परियोजनाओं के लिए 20000 करोड़ के विशेष पैकेज की व्यवस्था की गई तो किसानों को उम्मीद जगी है कि उनकी खेतीबड़ी पानी के अभाव में चौपट नहीं होगी।

उत्तराखंड के लिए ये घोषणाएं हैं काम की…

  • आपदाग्रस्त गांवों को अंत्योदय योजना के तहत विशेष पैकेज मिलेगा
  • केंद्र द्वारा वित्त पोषित योजनाओं में उत्तराखंड को स्पेशल कैटेगरी का दर्जा बरकरार
  • जैविक खेती के लिए भारी भरकम बजट से राज्य के किसानों को होगा फायदा
  • सिंचाई निधि से पहाड़ के वर्षा आधारित खेतों में लहलहाएगी फसल
  • बजट बढ़ने से चारधाम हाईवे का निर्माण कार्य और सुगम होने की उम्मीद बढ़ी
  • पशुपालन के लिए चार नए कार्यक्रमों की शुरुआत
  • प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में धनराशि बढ़ाई गई
  • किसान फसल बीमा योजना का बजट भी बढ़ाया गया
  • किसानों की आय पांच वर्ष में दोगुनी करने का उत्तराखंड को भी मिलेगा लाभ

जैविक उत्पादों का बजेगा डंका
केंद्र सरकार ने आम बजट में जैविक खेती का क्षेत्रफल पांच लाख हेक्टेयर करने का निर्णय किया है। उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर जैविक खेती होती है। हालांकि अभी तक जैविक उत्पादों की मार्केटिंग करने में केंद्र और राज्य सरकार दोनों नाकाम रही हैं। लेकिन अब जबकि केंद्र ने जैविक खेती का क्षेत्रफल बढ़ाने के साथ ही अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया है तो जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा।

डेयरी उद्योग को मिलेगी रफ्तार
बजट में पशुपालन से जुड़े चार नए कार्यक्रमों को संचालित करने संबंधी घोषणा से राज्य में न सिर्फ पशुपालन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जगी है, बल्कि दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में राज्य अग्रणी होगा। बता दें कि पशुपालन के क्षेत्र में उत्तराखंड ने तेजी से प्रगति की है।

डेयरी विकास को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से संचालित योजनाओं में राज्य ने कई कीर्तिमान भी स्थापित किए हैं। लेकिन अब जबकि बजट में पशुधन योजना समेत चार नए कार्यक्रमों की घोषणा की गई तो राज्य में डेयरी उद्योग को और गति मिलने की उम्मीद जगी है।

सीआईआई की निदेशक, डॉ. विभा मल्होत्रा ने कहा, बजट में एग्रीकल्चर सेक्टर पर विशेष तौर पर फोकस किया गया है। यह बहुत अच्छी पहल है। इससे देश में खेतीबाड़ी को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। खेतीबाड़ी को उद्योग का रूप देने की कोशिश है, जो अच्छी बात है।