नई दिल्ली।… केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली सोमवार को संसद में आम बजट 2016-17 पेश किया। जेटली ने आम लोगों के लिए टैक्स छूट तो नहीं बढ़ाई, लेकिन कई महत्वपूर्ण प्रावधान जरूर किए। पढ़ें बजट के बिंदु…

  • कर की बहुलता और व्यापकता को घटाने के लिए सालाना 50 करोड़ रुपये से कम वसूली वाले 13 कर हटाए गए।
  • छोटे करदाताओं की मदद के लिए ई-सहयोग का होगा विस्तार।
  • कर भुगतान अनुपालन में सरलता लाने के लिए ई-एसेसमेंट का दायरा बढ़ेगा।
  • कराधान प्रस्तावों से सरकार की आय 19,610 करोड़ रुपये बढ़ेगी।
  • कम आय दिखाने के मामले में जुर्माना कर का 50 फीसदी। गलत तथ्य पेश करने के मामले में जुर्माना 200 फीसदी।
  • पिछली तिथि प्रभावित होने वाले कर मामलों में ब्याज देनदारी के बदले बकाये कर का किया जा सकता है भुगतान।
  • ऊर्वरक में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण कुछ जिलों में पायलट आधार पर।
  • अघोषित आय घोषित करने के लिए 1 जून से 30 सितंबर तक सीमित कर अनुपालन खिड़की। इस पर कुल 45 फीसदी अधिभार और जुर्माना।
  • कोयला, लिग्नाइट और पीट पर स्वच्छ ऊर्जा कर प्रति टन 200 रुपये से बढ़कर 400 रुपये।
  • न्यूनतम मुकदमेबाजी के नजरिए के साथ कम कर वाली व्यवस्था बनने का लक्ष्य।
  • स्थिर और उम्मीद के मुताबिक कराधान व्यवस्था देने के लिए प्रतिबद्ध।
  • 5 लाख रुपये सालाना आय वाले करदाताओं को सालाना 3,000 रुपये की राहत। एक करोड़ करदाता होंगे लाभान्वित।
  • सालाना एक करोड़ रुपये आय पर आयकर अधिभार 12 फीसदी से बढ़कर 15 फीसदी होगा।
  • निरामयी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत साधारण बीमा योजनाओं को सेवाकर से छूट।
  • प्रतिस्पर्धा और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए सीमा और उत्पाद शुल्कों में उपयुक्त बदलाव होंगे।
  • 2017-18 से योजना, गैर-योजना का फर्क समाप्त होगा।
  • सालाना 5 लाख रुपये आय पर कर सीमा 2,000 रुपये से बढ़कर 5,000 रुपये।
  • किराये के मकान में रहने वालों को राहत : धारा 88 जी के तहत कर कटौती 24 हजार रुपये से बढ़कर 60 हजार रुपये।
  • कॉरपोरेट आय कर : नई विनिर्माण कंपनियों और छोटी कंपनियों को प्रोत्साहन।
  • 2016-17 के लिए वित्तीय घाटा का लक्ष्य 3.5 फीसदी।
  • जनरल एंटी-एवॉयडेंस रूल्स (गार) 1 अप्रैल 2017 से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध।
  • सरकारी कंपनियों के संपत्ति प्रबंधन के लिए नई नीति।
  • केंद्रीय सार्वजनिक उद्यमों में सरकारी निवेश के लिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।
  • सरकारी सेवाओं की बेहतर आपूर्ति के लिए तीन पहल।
  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत आवंटन बढ़कर 1,80,000 करोड़ रुपये।
  • दलहन के लिए बाजार स्थिरीकरण कोष को 900 करोड़ रुपये मिलेगा।
  • एकीकृत आंकड़े एकत्रीकरण और विश्लेषण के लिए वित्तीय डाटा प्रबंधन केंद्र।
  • मौद्रिक नीति प्रारूप को संवैधानिक आधार देने के लिए आरबीआई अधिनियम में होगा संशोधन।
  • खाद्य वस्तुओं के देश में उत्पादन और विपणन क्षेत्र में एफआईपीबी मार्ग से 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति।
  • विनिवेश विभाग का नया नाम होगा निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग।
  • परमाणु ऊर्जा के दोहन के लिए 15-20 साल की अवधि वाली व्यापक योजना बनेगी।
  • हर परिवार को एक लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा। पीएम जन औषधि योजना के तहत 300 जेनरिक ड्रग स्टोर खुलेंगे।
  • सड़क और राजमार्ग के लिए 55 हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव। 50 हजार किलोमीटर राज्य राजमार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग बनाया जाएगा।
  • स्टैंड अप इंडिया योजना को एससी, एसटी महिला उद्यमियों के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित।
  • गहरे समुद्र और अन्य गहरे स्रोतों से गैस उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • अवसंरचना क्षेत्र के विवादों के निपटारा के लिए ‘पब्लिक यूटिलिटी रिजोल्यूशन ऑफ डिस्प्यूट्स विधेयक’।
  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को मिला 1,700 करोड़ रुपये।
  • विद्यालय परित्याग प्रमाणपत्र के लिए डिजिटल डिपॉजिटरी।
  • 1,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ उच्च शिक्षा वित्तीयन एजेंसी की होगी स्थापना।
  • राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन से 76 लाख युवाओं को मिला प्रशिक्षण। 1,500 बहु-दक्षता प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना होगी।
  • राज्यों द्वारा स्वेच्छा से स्वीकार करने के लिए मॉडल शॉप्स एंड एस्टीबलेशमेंट विधेयक जारी किया जाएगा।
  • चालू खाता घाटा घटकर 14.4 अरब डॉलर।
  • ग्रामीण और शहरी निकायों के लिए 2.87 लाख करोड़ रुपये।
  • पशु कल्याण कार्यक्रम, पशु स्वास्थ्य कार्ड, ब्रीडरों को आपस में जोड़ने के लिए ई-विपणन प्लेटफार्म।
  • एक मई 2018 तक 100 फीसदी ग्रामीण विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल होगा।
  • मध्य और निम्न मध्य वर्ग के 75 लाख परिवारों ने स्वेच्छा से एलपीजी सब्सिडी का त्याग किया।
  • पीएमजीएसवाई के लिए 19 हजार करोड़ रुपये आवंटित।
  • 2015-16 में कृषि ऋण लक्ष्य 8.5 लाख करोड़ रुपये। 2016-17 के लिए नौ लाख करोड़ रुपये।
  • 2016-17 में कृषि के लिए 35,984 करोड़ रुपये आवंटित।
  • अगले तीन साल में जैविक खेती के जोत बढ़ाकर पांच लाख एकड़ किया जाएगा।
  • मनरेगा को मिलेगा 38,500 करोड़ रुपये।
  • बैंकों का आगामी वित्त वर्ष में पुनर्पूजीकरण।
  • दूरदर्शी वित्तीय नीति की जरूरत। घरेलू मांग बढ़ाए जाने की जरूरत। सुधार की जरूरत।
  • कृषि, ग्रामीण क्षेत्र, अवसंरचना और सामाजिक क्षेत्र के लिए कोष बढ़ा।
  • 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों और ओआरओपी कार्यान्वयन के चलते खर्च की प्राथमिकता तय करना जरूरी।
  • सुधार के नौ स्तंभ। इनमें कृषि, सामाजिक क्षेत्र, शिक्षा, अवसंरचना, वित्तीय अनुशासन और कर सुधार शामिल।
  • संकटपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था की पृष्ठभूमि में बजट पेश।
  • विरासत में मिली चुनौती को अवसर में बदला।
  • उपभोक्ता महंगाई दर घटकर 5.4 फीसदी आई, जो पहले नौ फीसदी से अधिक थी। आम आदमी को राहत मिली।
  • विदेशी पूंजी भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) सर्वोच्च स्तर पर।