उत्तर-पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में जहां इंडियन प्लेट यूरेशियन प्लेट में धंस रही है वहां बढ़ते भूगर्भीय तापमान के कारण ग्रेफाइट पत्थर भीतर जाकर बेशकीमती हीरे में बदल रहे हैं।

यही नहीं, सामान्य पत्थर भी भूगर्भ में जाकर गार्नेट, जरकॉन जैसे बेशकीमती रत्नों में तब्दील हो रहे हैं। यहां शोध कर रहे वैज्ञानिकों ने जब इन चट्टानों की कटाई की तो अंदर हीरे मिले। भूगर्भीय प्लेटों के टकराने की यह घटना उत्तरी-पश्चिमी हिमालय के पांच सौ वर्ग किमी क्षेत्र को ‘खजाना’ बना रही है।

दो भूगर्भीय प्लेटों के टकराने के इस ‘सबडक्शन’ क्षेत्र में हीरे, जवाहरात मिलने का वैज्ञानिकों ने पहली बार खुलासा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब सबडक्शन शुरू हुआ तो ऊपर के पत्थर नीचे गए। भूगर्भ में जब ये पत्थर 130 किमी नीचे पहुंचे तो सात सौ डिग्री सेल्सियस ताप और 40 किलो बार-प्रेशर पड़ने से इनकी ‘केमिस्ट्री’ बदली और ये रत्नों में तब्दील होने लगे। प्लेट धंसने की प्रक्रिया जारी रहने से ये धीरे-धीरे ऊपर आ गए।

हीरे के उत्पादन के बारे में कहा जाता है कि हजारों साल जमीन में दबे रहने के बाद कार्बन से हीरा बनता है। हीरा एक पारदर्शी रत्न है। यह रासायनिक रूप से कार्बन का शुद्धतम रूप है।

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चूंकि हीरे में सभी कार्बन परमाणु अति शक्तिशाली सह-संयोजी बन्ध से जुड़े होते हैं, इसलिए यह बहुत कठोर होता है। हीरे को यदि ओवन में 763 डिग्री सेल्सियस पर गरम किया जाए, तो यह जलकर कार्बन डाइ-आक्साइड बना लेता है तथा राख तक नहीं बचती है।

वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के लेह-लद्दाख से ढाई सौ किमी दूर सो मुरारी क्षेत्र की चट्टानों को काटने के बाद जरकान मिनरल की कटान पर 18 माइक्रोग्राम साइज के हीरे मिले।

वैज्ञानिकों का कहना है कि भूगर्भीय ताप पाकर जिरकोनियम-सिलिकेट जरकान, एल्म्युनो सिलिकेट गार्नेट में बदल रहा है। कोसाइट नीचे जाकर स्टीथो व्हाइट में बदल जाता है। कीमती पत्थर ओलिविन भी इस क्षेत्र में मिल रहा है। भूगर्भ की ऊपरी सतह पर संगमरमर भी यहां पाया जा रहा है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि चीन केडेनीसन क्षेत्र और नार्वे के नाइस क्षेत्र में भी भूगर्भीय प्लेटों के टकराने की घटना के बाद ग्रेफाइट और दूसरे पत्थर भूगर्भीय ताप से हीरे, ओलिविन में परिवर्तित हुए थे।

वैज्ञानिकों ने जांच में पाया है कि इंडियन प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे 10 करोड़ साल पहले धंसनी शुरू हुई थी। चट्टानों में जो नमूने मिले हैं वे तकरीबन पांच करोड़ साल पहले भूगर्भ में ग्रेफाइट से हीरे में परिवर्तित हुए हैं।