मदरसा डिग्री लेने वाले छात्र-छात्राओं के लिए एक खुशखबरी है। कैबिनेट ने उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद विधेयक-2016 को मंजूरी दे दी है। अब मुंशी, मौलवी को हाईस्कूल, आलिम को इंटर, कामिल को बीए और फाजिल को एमए के बराबर मान्यता मिलेगी। मदरसे की ये डिग्रियां उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित दूसरे राज्यों में भी मान्य होंगी। परिषद के न होने से अभी राज्य के अंदर और बाहर इन डिग्रियों को मान्य नहीं माना जा रहा था।

माध्यमिक शिक्षा परिषद की तर्ज पर उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद विधेयक को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा। यहां से हरी झंडी मिलने के बाद उत्तराखंड का अपना मदरसा एक्ट लागू हो जाएगा। अभी राज्य के पास एक्ट नहीं था, यूपी के मदरसा एक्ट के आधार पर किसी तरह व्यवस्था चल रही थी।

राज्य सरकार ने मुसलिम एजूकेशन मिशन को निरस्त करने के बाद 9 दिसंबर 2011 को मदरसा बोर्ड अधिसूचित कर दिया था, लेकिन नियमावली नहीं थी। उत्तराखंड का अपना मदरसा एक्ट न होने के कारण मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल, फाजिल की डिग्रियों को दूसरे राज्य तो मान्यता दे ही नहीं रहे थे, उत्तराखंड में भी ऊहापोह की स्थिति थी।

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विद्यालयी शिक्षा परिषद ने रामनगर की बैठक में मदरसा डिग्रियों की हाईस्कूल, इंटर, बीए, एमए की समकक्षता की मंजूरी 15 सितंबर 2015 को दे दी थी। फिर परिषद ने 6 जनवरी 2016 को इस संबंध में प्रस्ताव पास किया, लेकिन अभी तक शासनादेश जारी नहीं हुआ था। मदरसा शिक्षा परिषद विधेयक पारित होने और एक्ट लागू होने के बाद मदरसा छात्र-छात्राओं की डिग्रियां मान्य हो जाएंगी।

उत्तराखंड में कुल मदरसों की संख्या – 178

  • साल 2013 में 1605 छात्र पास
  • साल 2014 में 2033 छात्र पास
  • साल 2015 में 2369 छात्र पास
  • साल 2016 में 3885 छात्र पंजीकृत
  • मदरसों से डिग्रियां ले चुके कुल छात्र- 6007