हे ‘प्रभु’ उत्तराखंड को आपके रेल बजट से हैं ये बड़ी-बड़ी उम्मीदें

रेल मंत्री सुरेश प्रभु गुरुवार को वित्त वर्ष 2016-17 का रेल बजट पेश करेंगे और आम आदमी तथा कारोबारियों के लिए एक बड़ा सवाल यह है कि क्या यात्री और माल ढुलाई किराया बढ़ाया जाएगा। पिछले साल के रेल बजट में यात्री किराया नहीं बढ़ाया गया था, लेकिन माल ढुलाई किराया 2.1 फीसदी बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया गया था। इस बार उद्योग संघों की मांग है कि यात्री किराया बढ़ाया जाए।

हालांकि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों तक रेलगाड़ी पहुंचाने में अब तक की सरकारें नाकाम ही साबित हुई है। अंग्रेजों के जमाने में तराई तक ट्रेन पहुंच चुकी थी, तब से रामनगर, काठगोदाम, कोटद्वार, देहरादून, ऋषिकेश और टनकपुर सभी तराई के इलाकों तक ही रेल सुविधा सिमट कर रह गई। पिछले 7 दशकों में ट्रेन पहाड़ नहीं चढ़ पाई और अब पहाड़ के लोगों को ‘प्रभु’ से ढेरों उम्मीदें हैं।

रेल बजट से दूनवासियों को काफी उम्मीदें हैं और इन उम्मीदों के पूरे होने की आशा भी। इसकी वजह उत्तराखंड से लोकसभा में पांच और राज्य सभा में एक सांसद केंद्र की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी से हैं। ऐसे में रेल मंत्री सुरेश प्रभु से लोगों की उम्मीदें लाजमी हैं।

इन उम्मीदों में लंबे समय से पेंडिंग योजनाओं पर उचित कार्रवाई। इसके अलावा लोगों को रेल मंत्री सुरेश प्रभु के पिटारे से देहरादून के लिए कुछ और गाड़ियां निकलने की उम्मीद है। इसमें दून से जाने वाली जनता एक्सप्रेस का पूर्वांचल में रूट बढ़ने, गोरखपुर एक्सप्रेस का संचालन रोजाना करने, कुमाऊं के लिए दून से अतिरिक्त ट्रेन बढ़ने की उम्मीद है। इसी तरह हल्द्वानी, लखनऊ, इलाहाबाद, कानपुर, दिल्ली, पंजाब और दक्षिण भारत की तरफ गाड़ियों का रूट बढ़ने की उम्मीद लगाए हैं।

देहरादून स्टेशन पर प्लेटफॉर्म की क्षमता बढ़े
दून स्टेशन का विस्तार न होने प्लेटफॉर्म की क्षमता अब भी कम हैं। इसके चलते दून तक 13 कोच से अधिक की ट्रेन सामान्यत: नहीं आ पाती। यात्रियों की संख्या अधिक होने के बावजूद कोच नहीं बढ़ाए जा सकते। उम्मीद है कि प्लेटफॉर्म की क्षमता बढ़ने की दिशा में रेल मंत्री के पिटारे से कुछ निकले।

सहारनपुर रेल रूट वाया विकासनगर
देहरादून से वाया विकासनगर सहारनपुर रेल लाइन का प्रस्ताव कई साल से अधूरा पड़ा है। शिलान्यास से आगे इस पर बात नहीं बढ़ पाई है। अभी दून से हरिद्वार लक्सर होते हुए लंबी दूरी तय कर सहारनपुर जाना पड़ता है। विकासनगर से दूरी घटेगी और किराया भी कम पड़ेगा।

हिमाचल प्रदेश से सीधी रेल लाइन से जुड़ने की उम्मीद
रेल के जरिए उत्तराखंड और हिमाचल को सीधा जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना पर भी काम कागजी खानापूर्ति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। सामरिक महत्व के अलावा दोनों राज्यों में उद्यानिकी और कृषि आदि क्षेत्रों में व्यापार के लिहाज से भी यह महत्वपूर्ण है।

हरिद्वार-दून ट्रैक डबल होने की उम्मीद
रेल यात्रियों को उम्मीद है कि इस बार रेल मंत्री देहरादून से हरिद्वार रेल मार्ग को डबल लाइन करने की घोषणा भी कर देंगे। अभी सिंगल लाइन होने से हरिद्वार पहुंचने में दो घंटे से अधिक का वक्त लग जाता है।

दून-ऋषिकेश सीधी रेल लाइन को लेकर भी हैं उम्मीद
लोगों को उम्मीद है कि दून को सीधी रेल सेवा से तीर्थनगरी ऋषिकेश को जोड़ने के प्रस्ताव पर कुछ बात आगे बढ़ेगी। ताकि दून, सेलाकुई, मसूरी, विकासनगर के अलावा ऋषिकेश और उससे सटे क्षेत्रों के लोगों का सफर आसान हो सकेगा।

देश के हिमालयी राज्यों का 3500 किलोमीटर क्षेत्र चीन सीमा से सटा है। इसमें हिमाचल और उत्तराखंड का लगभग 500 किलोमीटर क्षेत्र भी शामिल है। उत्तराखंड में रेल सेवा अब भी चीन बार्डर से करीब 125 किलोमीटर पीछे है। कई तरफ तो यह दूरी और भी अधिक है। जबकि चीन अपनी सीमा से 11 किलोमीटर पहले तक रेल पहुंचा चुका है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, सीमावर्ती राज्यों में रेल सेवाओं के विस्तार के साथ ही हिमालयी राज्यों की आपस में कनेक्टिविटी भी सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लोगों की भी मांग है कि पड़ोसी हिमालयी राज्य को सीधी रेल लाइन से जोड़ना आज के समय की सख्त जरूरत है। इसलिए लोग अबकी बजट से उम्मीद लगाए हैं।

देहरादून से विकासनगर, कालसी रेल मार्ग की मांग लंबे समय से होती रही है। यहां तक रेल मार्ग पहुंचने के बाद हिमाचल को भी राज्य से सीधी रेल सेवा से जुड़ने की दिशा में बात आगे बढ़ सकेगी। जानकारों के मुताबिक, इसी तरह पुरोला, नौगांव, मोरी बड़कोट, गंगोत्री लाइन पर काम होता है तो यहां से भी हिमाचल के लिए रेल पहुंचाई जा सकती है। रेलवे के पूर्व अफसर एनडी मिश्रा के मुताबिक, चाइना बार्डर तक रेल पहुंचानी तो सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है ही। चीन बार्डर से लगे पड़ोसी हिमालयी राज्यों की रेल कनेक्टिविटी भी बहुत जरूरी है।

एसोचैम ने कहा, ‘यात्री किराया बढ़ाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव है, हालांकि आम आदमी समयबद्धता, स्वच्छता, सुरक्षा जैसी बेहतर सेवाओं के लिए अधिक खर्च करने के लिए तैयार है।’

प्रभु के सामने सबसे बड़ी चुनौति संचालन अनुपात बेहतर करने की है। उन्होंने पिछले बजट में इसे घटाकर 88.5 फीसदी पर लाने का वादा किया था। साल 2013-14 में यह 93.6 फीसदी और 2014-15 में 91.8 फीसदी था। वैश्विक मानक हालांकि 75-80 फीसदी या उससे कम है।

1989-90 के बाद से देश में रेल मार्गों की कुल लंबाई सिर्फ 0.06 फीसदी बढ़ी है। यात्री संख्या और माल ढुलाई हालांकि इस बीच क्रमश: 3.3 फीसदी और 2.2 फीसदी बढ़ी है। देश में मालगाड़ियों और यात्री गाड़ियों की औसत गति क्रमश: 25 किलोमीटर प्रति घंटा और 70 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह भी दुनिया में सबसे कम है।

रेल मंत्री को वेतन में 40 फीसदी (320 अरब रुपये) वृद्धि से निपटने के लिए कोष जुटाने पर भी विचार करना होगा। जेएलएल इंडिया के अध्यक्ष अनुज पुरी ने कहा, ‘भारतीय रेल के पास देशभर में विशाल भूमि है। इससे यह भूमि उपयोग बदलाव संबंधी विकास में एक बड़ा हितधारक हो सकता है।’

पुरी ने कहा, ‘इस बार के बजट में हमें उम्मीद है कि रेल मंत्री शहरी क्षेत्रों में रेलवे की भूमि का दोहन करने पर गौर करेंगे।’ क्षेत्र के हितधारकों के मुताबिक, प्रभु रेल डिब्बों की संख्या बढ़ाने, भौतिक अवसंरचना विकास, सार्वजनिक-निजी साझेदारी मॉडल सुधारने, यात्री सुविधा में सुधार और रेल परिवहन को प्रतिस्पर्धात्मक बनाने पर भी गौर करेंगे।

भारतीय रेल से रोजाना करीब 2.3 करोड़ लोग यात्रा करते हैं, जो ऑस्ट्रेलिया की आबादी के बराबर है। दैनिक माल ढुलाई का स्तर भी 26.5 लाख टन है। देश में कुल 7,172 स्टेशन, 12,617 यात्री रेलगाड़ियां और 7,421 मालगाड़ियां हैं और भारतीय रेल का नेटवर्क कश्मीर के बारामुला से तमिलनाडु के कन्याकुमारी तक तथा अरुणाचल प्रदेश के नाहरलागुन से गुजरात के बंदरगाह शहर ओखा तक फैला हुआ है।

संतोषजनक तरीके से लोगों की जरूरतों को पूरा करेगा रेल बजट
रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने बुधवार को कहा कि रेल बजट ‘संतोषजनक’ तरीके से सभी की जरूरतों को पूरा करेगा। उन्होंने कहा कि इसे तैयार करने में काफी मेहनत की गई है।

प्रभु ने कहा, ‘रेल बजट को राष्ट्रहित और रेलवे के हित को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।’ प्रभु गुरुवार को संसद में अपना दूसरा रेल बजट पेश करेंगे। रेल मंत्री ने कहा, ‘हमने सभी की जरूरतों को संतोषजनक तरीके से पूरा करने की कोशिश की है। बजट को तैयार करने में काफी मेहनत की गई है। हमने इसे तैयार करने से पहले जमीनी वास्तविकताओं को ध्यान में रखा है।’

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि रेलवे के लिए गैर किराया स्रोतों मसलन विज्ञापन, अतिरिक्त भूमि के व्यावसायीकरण के जरिए अतिरिक्त राजस्व जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। सूत्रों ने कहा कि इसके लिए एक अलग निदेशालय बनाने का भी प्रस्ताव है।