सीएम रावत ने रिजर्व बैंक से की उत्तराखंड के आपदा पीड़ितों के कर्ज पुनर्गठन की मांग

उत्तराखंड के विकास में भागीदार बनने का आग्रह करते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बुधवार को रिजर्व बैक से साल 2013 में राज्य में आयी प्राकृतिक आपदा के बाद बैंक ऋण चुकाने में कठिनाई महसूस कर रहे लोगों के लिए कर्ज पुनर्गठन योजना लाने की वकालत की है।
देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 56वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि साल 2013 के बाद से उत्तराखंड में विपरीत प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण लोग अपना बैंक ऋण चुकाने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने इस संबंध में अपर मुख्य सचिव एस. रामास्वामी को निर्देश दिए कि बैंकों से राज्य सरकार को क्या अपेक्षाएं हैं, उस पर अगली एसएलबीएस बैठक में राज्य सरकार की ओर से बैंकों को प्रस्ताव दिए जाएं। इसके अलावा रावत ने बैंकों से सहकारी ग्रामीण फार्मिंग में सहयोग करने, महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित करने तथा प्रशिक्षितों को आसान ऋण उपलब्ध करवाने को कहा।
इस संबंध में उन्होंने पिछले दिनों नाबार्ड द्वारा जारी किए गए फोकस पेपर का जिक्र करते हुए कहा कि अगर सभी बैंक उसे आधार बनाकर कार्ययोजना बना लें तो कृषि व आजीविका दोनों में काम की काफी गुंजाइश है।
रावत ने कहा, हम समूह आधारित कृषि आर्थिकी की तरफ बढ़ रहे हैं। इस वर्ष हम किसानों की शेयर धारिता के आधार पर सहकारी कम्पनी बनाकर क्लस्टर खेती की योजना बना रहे हैं। इसमें प्रारम्भिक पूंजी की जरूरत को बैंक पूरा कर सकते हैं। आजीविका मिशन में अभी तक बैंकों के ज्यादा आगे नहीं आने की बात कहते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर बैंक यहां भी रियायती दर पर ऋण उपलब्घ करवाएं तो इससे सीमांत व लघु कृषक लाभान्वित होंगे।
रावत ने कहा इस संबंध में राज्य सरकार के अधिकारियों से अनुदान आधारित कार्ययोजना बनाने को कहा गया है जिसमें बैंकों का सहयोग लेते हुए स्वयं सहायता समूहों को पुन: सक्रिय किया जा सके।
इस संबंध में रावत ने कहा कि यदि 50 प्रतिशत महिला स्वयं सहायता समूहों को भी सक्रिय कर दिया जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। रावत ने विभिन्न तरह की रियायतें समाप्त होने से उत्तराखंड में उद्योगों के सामने चुनौतीपूर्ण स्थिति आने की बात कहते हुए कहा कि राज्य सरकार उद्योगों की सहायता के लिए हर सम्भव प्रयास कर रही है।
उन्होंने बताया कि अप्रैल से 24 घंटे बिजली, सिंगल विंडो सिस्टम, स्किल श्रम आदि तरीकों से सिस्टम में सुधार किया जा रहा है। उन्होंने बैंकों से भी ऐसी योजना बनाने को कहा ताकि पहले से स्थापित उद्योगों की कठिनाईयां कम हो सकें। बैठक में बताया गया कि राज्य का रिण जमा अनुपात लगभग 58 प्रतिशत है।